अल्मोड़ा। अल्मोड़ा चिड़ियाघर की विशेष पहचान और हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे तेंदुए बदहाल व्यवस्थाओं का सामना कर रहे हैं। इनके लिए यहां पर्याप्त जगह की कमी है। हालात ये हैं कि पांच तेंदुए के रहने के बाड़े में आठ तेंदुए रह रहे हैं। यहां किसी तरह महज चार बाड़े में दिन बिता रहे शेरू, टीटू, गोपी, डॉली, जेके राजा, गुड्डू, जूली, नीलू भी यह समझ चुके हैं कि अब उनके लिए पर्याप्त जगह की व्यवस्था भी सरकार नहीं कर सकेगी।
अल्मोड़ा नगर से दो किमी दूर एनटीडी में स्थापित चिड़ियाघर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां बाड़े में रखे गए आठ तेंदुए यहां की विशेष पहचान हैं जिन्हें शेरू, टीटू, गोपी, डॉली, जेके राजा, गुड्डू, जूली, नीलू के नाम से पहचान मिली है। कभी जंगलों में राज करने वाले ये सभी तेंदुए वर्ष 2009 से यहां रहते हुए बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार हैं। चिड़ियाघर में सिर्फ पांच तेंदुओं के रहने के लिए जगह है जिसके लिए चार बाड़े की व्यवस्था है। नियमों के मुताबिक हर बाड़े में एक ही तेंदुए को रखा जा सकता है। यहां चार बाड़े में आठ तेंदुओं का आशियाना बनाया गया है। संवाद
उपचार के लिए भी नहीं हैं डॉक्टर
अल्मोड़ा। उम्र गुजरने के साथ इन तेंदुओं के अलावा यहां मौजूद सांभर, चीतल, घुरल, सफेद बंदर को आए दिन इलाज की जरूरत पड़ती है। उनके इलाज के लिए यहां चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। चिकित्सक का पद वर्षों से रिक्त है। वन विभाग उधारी के डॉक्टर के भरोसे यहां बंद जानवरों को इलाज उपलब्ध कराने की मजबूरी से गुजर रहा है।
निश्चित तौर पर तेंदुओं के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। इस बारे में उच्चाधिकारियों से वार्ता की जाएगी। तेंदुओं को बेहतर सुविधाएं देने के प्रयास गंभीरता से हो रहे हैं।
दीपक कुमार पंत, प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी, मृग विहार, अल्मोड़ा।