फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

National Games: कुमाऊंनी कला-संस्कृति ने देवभूमि की सरहद के पार तक बनाई साख, 22 राज्यों तक मिली पहचान

Wed, 05 Feb 2025 11:20 AM IST
हीरा मेहरा चंदन नेगी, संवाद

सार

राष्ट्रीय खेलों के तहत अल्मोड़ा ने योगासन प्रतियोगिता की मेजबानी की। इसमें अपने कोचों के साथ 22 राज्यों के खिलाड़ी यहां पहुंचे। मेहमान खिलाड़ियों के जरिये कुमाऊं की कला-संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को देवभूमि की सरहद के पार दूर-दूर तक पहचान मिली। 
विज्ञापन
अल्मोड़ा स्टेडियम में लगे स्टॉलों पर उत्पाद देखते मेहमान खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड में चल रहे 38वें राष्ट्रीय खेलों के तहत अल्मोड़ा ने योगासन प्रतियोगिता की मेजबानी की। इसमें अपने कोचों के साथ 22 राज्यों के 171 खिलाड़ी यहां पहुंचे। मेहमान खिलाड़ियों के जरिये कुमाऊं की कला-संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को देवभूमि की सरहद के पार दूर-दूर तक पहचान मिली। इसके साथ ही ‘लोकल फॉर वोकल’ की थीम आगे बढ़ी।

उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन ने पहाड़ी राज्य की कला-संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर पहचान देने का मौका दिया। अलग-अलग राज्यों के खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा दिखाई। मेहमान खिलाड़ी पहाड़ की कला-संस्कृति, नैसर्गिक सौंदर्य, परंपरा, लोकगीत, लोकनृत्य, वाद्य यंत्र, रहन-सहन, खान-पान व पहनावा आदि से रूबरू होकर इसका अनुभव व सुखद संदेश अपने साथ ले जा रहे हैं। इससे कई प्रदेशों तक उत्तराखंड की लोक संस्कृति को पहचान मिलेगी। अल्मोड़ा में खेल के शुभारंभ व समापन पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये उन्हें पहाड़ के गीत, नृत्य और कला की झलक देखने को मिली। मेहमान खिलाड़ियों के मन में कुमाऊं के छोलिया नृत्य ने अलग छाप छोड़ी।

राष्ट्रीय खेलों ने पहाड़ के उत्पादों को प्रदर्शित करने तथा पहचान दिलाने का एक बड़ा मंच प्रदान किया। आयोजन स्थल पर अल्मोड़ा में महिला समूहों ने पांच स्टॉल लगाए थे। इनसे दोहरा लाभ मिला। एक तो लोकल उत्पादों को पहचान मिली और मेहमान खिलाड़ियों के जरिये इनकी पहचान सूबे-सूबे तक होगी। दूसरी ओर इन स्टॉलों से उत्पादों की बिक्री ने महिला समूहों की आजीविका बढ़ाई। स्टॉलों पर खिलाड़ी स्थानीय ऐपण कला, इससे सुसज्जित साड़ियां व ताम्र पात्र, हस्तनिर्मित दुपट्टे, पहाड़ी टोपियां, गमछे, फाइल फोल्डर्स, हैंडलूम के शॉल, स्थानीय स्तर पर तैयार मिलेट्स, पल्सेज, जूस, जैम, बुरांश व माल्टा का जूस, मडुवे के आटे से बने हाई क्वालिटी के लजीज बिस्कुट आदि से परिचित हुए और कई खिलाड़ी पसंदीदा उत्पाद खरीद कर साथ ले गए हैं। उनमें स्थानीय उत्पादों के बारे में जानने की उत्सुकता देखी गई। कइयों ने इनके बारे में जानकारी भी ली।

आयोजन स्थल के इर्द-गिर्द सड़कों व मार्गों के किनारे पर्वतीय संस्कृति को उजागर करते म्यूरल्स ने भी मेहमानों का ध्यान खींचा। यहां का लजीज भोजन उन्हें परोसा गया जो उन्हें खूब भा़या। मडुवे की रोटीू और बिच्छू घास की सब्जी ने अलग छाप छोड़ी। 

राष्ट्रीय खेल के चलते स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित कर बाजार उपलब्ध कराने व उनका प्रचार करने की पहल प्रशासन ने की थी। स्टॉल लगाने का लक्ष्य था कि देशभर से आने वाले खिलाड़ी उत्पादों से रू-ब-रू हो सकें और इनकी पहचान अन्य प्रदेशों तक बने। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं महिलाओं के माध्यम से भोजन बनवाकर ड्यूटी में लगे कर्मियों तक पहुंचाया गया ताकि महिलाओं की आजीविका में वृद्धि हो सके। - देवेश शासनी, मुख्य विकास अधिकारी, अल्मोड़ा

 

प्रधानमंत्री के कांसेप्ट लोकल फॉर वोकल को साकार करने के लिए राष्ट्रीय खेल के दौरान यहां महिला समूहों से स्टॉल लगवाए गए जो स्थानीय उत्पादों से भरे थे। इससे स्थानीय महिलाओं को मंच मिला और उत्पादों को पहचान मिली। बाहर से आए खिलाड़ियों ने स्टॉल पर उत्पाद देखे और उन्होंने उत्सुकतावश उनके बारे में जानकारी ली। उन्हें खाद्य पदार्थों में यहां की मंडवे की रोटी, सिसूण (बिच्छू घास) की सब्जी तथा उत्पादों में पहाड़ी टोपियां, ऐपण कला व गमछे इत्यादि ज्यादा पसंद आए। वे पसंदीदा चीजें खरीद कर ले गए और उन्होंने यह भी कहा कि वे पहाड़ी उत्पादों के बारे में अपने क्षेत्र में बताएंगे। - इंद्रा अधिकारी, नोडल अधिकारी (मार्केटिंग), ग्राम्य विकास, अल्मोड़ा

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें