अल्मोड़ा में सड़क पर आया मलबा। संवाद
अल्मोड़ा। जिले में आपदा ने जिन लोगों को जख्म दिए हैं, उन पर मरहम लगाने में सरकार नाकाम साबित हुई है। जिले में बीते 13 सालों से आपदा के जख्म सहते हुए विस्थापन का इंतजार कर रहे 208 परिवार इसका प्रमाण हैं। इनके विस्थापन की फाइल शासन में धूल फांक रही है। हालात यह हैं कि हर साल आपदाकाल में इनके विस्थान की बात होती है और आपदाकाल बीतते ही सभी दावे हवाई साबित होते हैं।
अल्मोड़ा में वर्ष 2010, 2012 और 2013 में आई आपदा में 208 परिवार प्रभावित हुए। मकान क्षतिग्रस्त होने से इन्हें पड़ोसियों और अन्य स्थानों पर शिफ्ट तो किया गया और जल्द विस्थापन के दावे किए गए। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। आपदा की मार सहने वाले इन परिवारों का दर्द खुद इन्हें राहत पहुंचाने के दावे करने वाले सिस्टम ने बढ़ाया है। अब भी ये परिवार आपदा के जख्म सहते हुए विस्थापन की राह देख रहे हैं। इनका सुरक्षित विस्थापन कब होगा, इन्हें जर्जर और खतरा बने मकानों से कब छुटकारा मिलेगा यह कोई नहीं जानता। प्रभावित परिवार इस आपदाकाल में भी खौफ के साए में जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। संवाद
भैंसियाछाना में विस्थापन की जद में सबसे अधिक प्रभावित
अल्मोड़ा। वर्ष 2010 से 13 तक भैंसियाछाना में आपदा ने कहर बरपाया। यहां सबसे अधिक 102 परिवार प्रभावित हुए। तब प्रशासन ने प्रभावितों से जल्द विस्थापन के दावे किए थे जो अब तक पूरे नहीं हो सके हैं।
प्रभावित परिवार
तहसील प्रभावित परिवारों की संख्या
भैंसियाछाना 102
लमगड़ा 41
सल्ट 20
चौखुटिया 03
रानीखेत 42
डीएम विनीत तोमर का कहना है कि आपदा प्रभावितों के विस्थान का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति के बाद ही विस्थापन संभव है।