फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीला रतुवा रोग पर अंकुश लगाएगा वीएल 953

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। गेहूं में पीला रतुवा रोग लगने की शिकायत के बाद विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने गेहूं की एक और वैरायटी तैयार की है। वैज्ञानिकों के अनुसार वीएल 953 नाम की इस नई वैरायटी में पीला रतुवा जैसे रोगों से लड़ने की काफी क्षमता है। उत्तराखंड में गेहूं की खेती करने वाले किसान अधिकतर देसी या घर के बीज ही बोते हैं। वैरायटी निश्चित नहीं होने के कारण यह गेहूं मिक्स रूप में उपलब्ध होता है। इसमें भी अधिकतर गेहूं पीला रतुवा रोग लगने के कारण खराब हो जाता है। फसलों को लेकर लगातार अनुसंधान कर रहे विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक भी मानते हैं कि उत्तराखंड में गेहूं की फसल में अधिकतर पीला रतुवा रोग लग जाता है जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने पिछले पांच सालों में पहाड़ की फसलें गेहूं, धान, मटर, सोयाबीन, मक्का, मादिरा आदि की 25 वैरायटी निकाली हैं। इसमें गेहूं की फसल पर ज्यादा ध्यान दिया है। वीपीकेएस के निदेशक डा. अरुणव पटनायक के अनुसार जाड़ों में बारिश के बाद गेहूं के पौधों में पीला रतुवा रोग लग जाता है। जिसमें गेहूं के पत्ते पीले पड़ जाते हैं। डा. पट्टनायक ने बताया कि किसानों की शंकाओं और समस्याओं पर ध्यान देते हुए संस्थान के वैज्ञानिकों ने गेहूं में पीला रतुवा रोग पर रोकथाम के लिए वीएल 953 गेहूं की नई वैरायटी तैयार की है। उन्होंने बताया कि नई वैरायटी में पीला रतुवा रोग लगने की संभावना काफी कम है। इससे पहले संस्थान के वैज्ञानिक वीएल गेहूं 829 और वीएल गेहूं 892 वैरायटी भी निकाल चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें