अल्मोड़ा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सोमवार को निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज परिसर में विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इसमें श्रमिकों को उनके अधिकार, नाल्सा की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण के सचिव डॉ. शेष चंद्र ने कहा कि देश में गरीबी के कारण बच्चों को भी अपने माता-पिता की सहायता के लिए मजदूरी करनी पड़ती है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक, जोखिम भरे उद्योगों में लगाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इसका उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 के बारे में बताया। कहा कि पुरुष, महिला श्रमिकों को संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत बराबरी का अधिकार दिया गया है। भेदभाव करना अपराध होगा। ऐसे व्यक्ति को दंडित भी किया जा सकता है। मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सरकार ने अलग कानून बनाए हैं ताकि विभिन्न फैक्ट्रियों आदि संस्थाओं में कार्य करने वाले मजदूरों की मजदूरी नियत की जा सके। संस्थान के मालिकों का नैतिक दायित्व है कि मजदूर के सेवाकाल के मद्देनजर उसे विभिन्न सुविधाओं के रूप में अतिरिक्त लाभ उपलब्ध कराएं। इस मौके पर 100 सरल कानूूनी ज्ञानमाला पुस्तकें बांटी गईं। शिविर में पैरा लीगल वालंटियर दीपा पांडे, अरुणेंद्र राज तिवारी समेत मेडिकल कॉलेज के मजदूर भी थे।