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Varanasi: काशी विद्यापीठ के गंगापुर परिसर में शुरू होंगे योग और नेचुरोपैथी के कोर्स, कर सकेंगे BA और MA

Fri, 23 Jun 2023 11:04 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गंगापुर परिसर में योग एवं नेचुरोपैथी के अस्पताल के साथ ही स्नातक और परास्नातक के पाठ्यक्रम भी शुरू होंगे। 
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काशी विद्यापीठ गंगापुर परिसर - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गंगापुर परिसर में योग एवं नेचुरोपैथी के अस्पताल के साथ ही स्नातक और परास्नातक के पाठ्यक्रम भी शुरू होंगे। शुक्रवार को अखिल भारतीय चिकित्सा परिषद के 40वें राष्ट्रीय सम्मेलन में सहमति बनी। विद्यापीठ जल्द ही आयुष मंत्रालय के सहयोग से प्रोजेक्ट तैयार कर राजभवन को भेजेगा। 

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मुख्य अतिथि अखिल भारतीय चिकित्सा परिषद की महासचिव डां. शिखा सान्याल ने कहा कि अस्पताल में मरीज रोगी के रूप में जाता है, लेकिन वापस डॉक्टर के रूप में आता है। भारत में बहुत से लोग महंगे चिकित्सकीय सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं, ऐसे में प्राकृतिक चिकित्सा उन्हें सहायता प्रदान कर सकती है।

परिषद के अध्यक्ष प्रो. शंकर कुमार सान्याल ने कहा कि हमे रोजगार खोजना नहीं उपलब्ध कराने वाला बनना है। अच्छे केंद्रों की स्थापना के साथ ही योग्य चिकित्सक भी पैदा करना होगा ताकि समाज लाभ ले सके। कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि सम्मेलन से कुछ सार्थक बातें निकली जो प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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हमारी प्राकृतिक चिकित्सा का उल्लेख वेद, पुराण और शास्त्रों में है, लेकिन हम उसका श्रेय विदेशी विद्वानों को देते हैं। इस दौरान कुलसचिव डाॅ. सुनीता पांडेय, उपकुलसचिव हरीशचंद, प्रो. अमिता सिंह मौजूद रहीं। स्वागत प्रो. सुशील कुमार गौतम, प्रो. संजय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एनपी सिंह और संचालन डाॅ. चंद्रमणि ने किया।

यौगिक क्रियाओं से दूर हो सकता है थायराइड

प्रथम सत्र में डाॅ. रमेश चंद्र ने कहा कि थायराइड के अनियंत्रण के फलस्वरूप शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर दुष्प्रभाव देखने को मिलता है। इसका निदान तमाम यौगिक क्रियाओं से किया जा सकता है। गर्दन के व्यायाम विशेषकर सूर्य नमस्कार, उज्जैनी त्रिबंध के साथ बहुत लाभकारी होता। प्रो. सरस्वती काला देहरादून ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत कार्य हुए हैं, लेकिन वह आम जन तक नहीं पहुंच पाए। लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति विश्वास कम है।
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स्वामी शंकरानंद सरस्वती ने कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा एक दूसरे के पूरक हैं। अज्ञानता को दूर करना है तो उसे जानना होगा, अर्थात चल रहे विषयों में सुधार की आवश्यकता है। देश भर से आए प्रतिभागियों ने 30 से भी ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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