वाराणसी। सड़क दुर्घटनाओं के कारण असमय और रोकी जा सकने वाली मौत पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना के तहत मंगलवार को यातायात पुलिस लाइन में सीपीआर प्रशिक्षण कार्यशाला हुई। सड़क दुर्घटना या किसी भी आकस्मिक आपात स्थिति के बाद ''''गोल्डेन आवर'''' में पीड़ित को त्वरित, सही और जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर मृत्यु दर को न्यूनतम करना है। कार्यशाला में जेडएफडी योजना के तहत थानों से गठित सीसी टीम (क्रिटिकल कॉरिडोर टीम) के पुलिसकर्मियों के साथ-साथ लगभग 800 रिक्रूट ने भाग लिया। सीपीआर की प्रक्रिया का लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया, जिसमें चेस्ट कंप्रेशन, श्वसन मार्ग को खुला रखने की विधि, बेहोश व्यक्ति की जांच और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने के उपायों का अभ्यास कराया गया। जिला अस्पताल के सीपीआर विशेषज्ञ डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि सीपीआर (हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन) एक ऐसी आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति का हृदय धड़कना बंद कर दे या सांस रुक जाए। सीपीआर के अंतर्गत छाती पर निश्चित दबाव (चेस्ट कंप्रेशन) देकर हृदय का कार्य अस्थायी रूप से चलाया जाता है, जिससे मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचता रहता है। पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने तक जीवन बनाए रखने में सहायता मिलती है और मृत्यु की संभावना में उल्लेखनीय कमी आती है। हृदय रुकने के बाद पहले 5 से 10 मिनट निर्णायक होते हैं। इस अवधि में सही तरीके से सीपीआर दिया जाए तो व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ब्यूरो