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Varanasi News: महिलाएं जो बातें किसी से नहीं कह पाती थीं वो लोकगीतों में कह देती थीं

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बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र में शुक्रवार को सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भोजपुरी लोकगीत और चित्रकला : पाठ, गायन, चित्रांकन की थीम पर संवाद हुआ। प्रो. आरती निर्मल ने कहा कि भावों के सागर से विचारों की दुनिया में लौटना कठिन है, क्योंकि आनंद की अनुभूति तो हो सकती है लेकिन अभिव्यक्ति नहीं। कामकाजी महिलाएं जो बातें काम करते समय किसी से नहीं कह पाती थीं वो लोकगीतों में कह देती थीं। इस दौरान तोहरा से ही चांद सुरुजवा, जइसे रोज आवेलू तू टेर सुनके और कहे के त सभे केहु आपन, आपन कहाये वाला के बा और ए गुइयां जिनगी पहाड़ अस लागे आदि गीतों की प्रस्तुतियां दी गईं। गोरखपुर से आए लोक गायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने गर्भ से लेकर विवाह तक के संस्कार गीतों की प्रस्तुति के साथ ही सोहर मचिया बैठाले राजा दशरथ..., मुंडन गीत घर मे से निकले होरिलवा, दुअरियवे में रोवेला हो...’ की प्रस्तुति दी। यज्ञोपवीत गीत, विवाह गीत गाय के गोबरा में महादेव अंगना लिपाई..., शगुन के मंगल गीत गाकर लोगों का मनोरंजन किया।
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