साल भर फूलों की डिमांड रहती है। इस वजह से इसकी मार्केट आसानी से हासिल हो जाती है। फूलों को बेचने में दिक्कत नहीं होती है। हालांकि इस बार लॉकडाउन के कारण फूलों की बिक्री कम हुई तो सब्जियों से भरपाई हो जाएगी। खास बात यह कि पॉली हाउस में कंपोस्ट खाद भी तैयार हो रही है, जिसकी मदद से वह अन्य पारंपरिक फसलों का अच्छा उत्पादन कर रहे हैं।
सोना उगलेंगे खेत, बस तकनीक बदलने की जरूरत
डॉ हरेंद्र सिंह का कहना है कि खेती से ही हम सबकी पहचान है। फिर इसमें हाथ लगाने से परहेज कैसा। खेत हम सबका पेट भरते हैं और सब मुंह मोड़ेगा तो फसल कैसे होगी। वैसे भी सरकार खेती को प्रोत्साहन के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। बस जागरूक होकर इसका लाभ उठाने की जरूरत है। तकनीक के साथ मिलकर मिट्टी से प्यार करें तो खेत आज भी सोना ही उगलेंगे।
क्या है पॉली हाउस
जिला उद्यान अधिकारी हरिशंकर ने बताया कि पॉली हाउस का इस्तेमाल उन फसलों के लिए किया जाता है जो कम तापमान में उगती हैं। इसमें फसल को पूरी तरह से कवर कर दिया जाता है। इसके अंदर पंखे लगाकर तापमान को स्थिर रखा जाता है। विदेशी फूल और कई सब्जियां जलवायु परिवर्तन के कारण हमारे देश में हर मौसम में नहीं उग पाते हैं। जरबेरा फूल ठंडे मौसम में उगता है। इसी तरह से गोभी, टमाटर आदि सब्जी भी पॉली हाउस में उगाए जा सकते हैं। जिस फसल के लिए जितना तापमान चाहिए होता है, इसमें उतना ही मेंटेन किया जा सकता है।