मोहर्रम पर दालमंडी के मुसाफिर खाने के पास से निकाले गए जुलूस में इमाम हुसैन की शहादत की याद
आठवीं मुहर्रम पर दालमंडी स्थित अजाखाना हकीम मोहम्मद काजिम में मजलिसे-अजा हुई। इसे मौलाना वसी असगर पाशा ने खिताब किया। वहीं, चाहमामा स्थित ख्वाजा नब्बू के इमामबाड़े से तुर्बत व अलम का जुलूस निकला। कार्यक्रम संयोजक सैयद मुनाजिर हुसैन मंजू के नेतृत्व में यह जुलूस रात 8:30 बजे बरामद हुआ। जुलूस से पहले अब्बास मुर्तजा शम्सी ने मौला अब्बास की शहादत का मंजर बयान किया। जुलूस उठने पर लियाकत अली खां व उनके साथियों ने पारंपरिक सवारी पढ़ी, जब हाथ कलम हो गए सक्का-ए-हरम के, और अर्शे बरी हिल गया गिरने से अलम के...। यह जुलूस चाहमामा से दालमंडी स्थित हकीम के अजाखाने पर पहुंचा। वहां अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख्वानी शुरू की, अब्बास क्या तराई में सोते हो चैन से...। इस दौरान शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब जैदी, शफाअत हुसैन शोफी, मजाहिर हुसैन, राजा व शानू ने नौहाख्वानी व मातम किया। इस दौरान उस्ताद फतेह अली खां व उनके साथियों ने शहनाई बजाई।