विश्वेरगंज स्थित फल मंडी के पास दंत निपोर कवि सम्मेलन में नृत्य करते कलाकार । अमर उजाला
राग कश्मीरी बांसुरी से वो बजाते थे, मैंने जब बांस बजाया तो बुरा मान गए..., होली आती है हर एक दिन को मिलाने के लिए..., हंसकर गले से दुश्मन को लगाएंगे... जैसी काव्य रचनाएं सुन लोग खूब लोट-पोट हुए। मौका था बृहस्पतिवार को विश्वेश्वरगंज स्थित भयंकर दंत निपोर महासम्मेलन का। स्व. पं. संकठा प्रसाद पांडेय की ओर से शुरू इस अनूठे अंतरराष्ट्रीय दंत निपोर महासंघ के बैनर तले लोगों को हंसाने और निरोग रहने का महामंत्र देने के लिए 27 साल से शुरू दंत निपोर सम्मेलन में पूर्वांचल भर के कवियों की जुटान हुई। हास्य कवि डॉ. रामअवतार पांडेय के संचालनत्व में कवियों ने हास्य व्यंग्य से भी को खूब हंसाया। निजान बनारसी, सुरेश कुमार अकेला, डंडा बनारसी, बृजेश पांडेय, आशिक बनारसी आदि कवियों ने चुटीली रचनाओं से लोगों को हंसने के लिए विवश किए। इस दौरान कलाकारों ने शिवतांडव, मसाने की होली, राधाकृष्ण की झांकी सजाई। फूलों और अबीर गुलाल की होली संग नंदी बाबा का भी मनोहारी नृत्य पेश किया। महासंघ के अध्यक्ष नामवर राय व संयोजक सुनील पांडेय की काव्य रचनाओं का आनंद उठाने मेयर अशोक कुमार तिवारी, उप सभापति नगर निगम सुरेश चौरसिया, पं. विजय शंकर पांडेय, पं. राजेश पांडेय के अलावा कवियों को सम्मानित किया।