भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान शाहंशाहपुर में बुधवार को आईपीआर पोर्टफोलियो को सुदृढ़ करना विषय पर बौद्धिक संपदा जागरूकता कार्यक्रम हुआ। वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को बौद्धिक संपदा अधिकार, प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण और कृषि अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में उभरती चुनौतियों के प्रति जागरूक किया गया। काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, उत्तर प्रदेश की ओर से प्रायोजित आईआईवीआर के जोनल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट यूनिट (जेडटीएमयू) की ओर से कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधानों को किसानों, उद्योग और समाज के लिए उपयोगी प्रौद्योगिकियों में रूपांतरित करने के लिए बौद्धिक संपदा की प्रभावी सुरक्षा और रणनीतिक प्रबंधन जरूरी है। तकनीकी सत्र में कृषि में आईपीआर परिदृश्य विषय पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिव दत्त कृषि से संबंधित बौद्धिक संपदा प्रणालियों जैसे पेटेंट, पौधा किस्म संरक्षण, ट्रेडमार्क एवं भौगोलिक संकेतक बारे में जानकारी दी। डॉ. एसके तिवारी ने आईसीएआर-आईआईवीआर ने भारत में आईपीआर मुद्दे संभावनाएं एवं कॅरिअर अवसर विषय पर व्याख्यान दिया। वैज्ञानिक डॉ. सुदर्शन मौर्य, डॉ. एएन त्रिपाठी, डॉ. राकेश कुमार दुबे, डॉ. इंदिवर प्रसाद रहे।