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'ऐ जिंदगी जब तेरे नजदीक आता हूं...', लॉकडाउन में सीआरपीएफ की 95 बटालियन के सहायक कमांडेंट ने लिखी ये कविता

Mon, 11 May 2020 01:58 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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विकाश कुमार सहायक कमांडेंट (95 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, वाराणसी)। - फोटो : अमर उजाला।
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सेना और अर्धसैनिक बलों के अधिकारी और जवान जिस अनुशासन का परिचय सार्वजनिक तौर पर देते हैं, वैसे में आम तौर पर उन्हें हम कठोर और शुष्क मान लेते हैं। लेकिन हर ऐसे अधिकारी-जवान के पास भी एक खूबसूरत दिल होता है। हमारी-आपकी, देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी के साथ-साथ इनके पास भी भावनाओं का ज्वार होता है। इनमें से कई अपनी भावनाओं को कविता-कहानी के माध्यम से भी व्यक्त करते हैं। ऐसे ही अधिकारी हैं सीआरपीएफ की 95 बटालियन के सहायक कमांडेंट विकाश कुमार। पढ़िए, इनकी यह कविता।

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जब जब तेरे नजदीक आता हूँ 
खुद को खुद से कितना दूर पाता हूँ  

     सुबह की पहली किरण हो,
     या हो शाम कि धूमिल खामोशी 
     सोचता हूँ कुछ 
     कुछ और ही पाता हूँ  
 ऐ जिंदगी,
 जब जब तेरे नजदीक आता हूँ 
 खुद को खुद से कितना दूर पाता हूँ।।

      एक मैं ही नहीं हूँ इस संसार में विवश 
      जीवन के हर रूप, हर अभिरूप 
      है सभी को लपेटे अजीबो कश्म-कश 
चाहकर भी नहीं निकल पाता है कोई  
जिंदगी इतनी तेज दौड़ेगी ना सोचा कभी 
ठहराव भी आने पर नहीं रूक पाता है कोई 
ऐ जिंदगी,
जब जब तेरे नजदीक आता हूँ 
खुद को खुद से कितना दूर पाता हूँ।।

     सोचा था कि तुमसे मिलूंगा जल्द ही 
     सबको पता था कि ये मन का भ्रम है  
     और भ्रम टूट जाता है,  कितना ही रोके कोई 
खैर ..ये सब जिंदगी के परीक्षाएँ  हैं  
एक के बाद एक पार हो जाएंगे,  ऐसी आशायें हैं  

जिंदगी ज्यादा तो कुछ नहीं सिखलाती है 
अपनों से दूर होने का दर्द बखुबी बतलाती है 
 
धर्म, पंथ, जाती,  सब के सब हैं  बेकार 
मानव सेवा ही है इसका एकमात्र उपचार 
यही बात दुनिया और 
अपने आप को समझाता हूँ 

ऐ जिंदगी,
जब जब तेरे नजदीक आता हूँ 
खुद को खुद से कितना दूर पाता हूँ।।

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