नैमिषारण्य में बीएचयू की तर्ज पर ही वेद विज्ञान अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र का निर्माण किया जाएगा। केंद्र में गुरुकुल शिक्षा पद्धति के साथ ही वेदों का अध्ययन और शोध होगा। बृहस्पतिवार को बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के समिति कक्ष में केंद्र के स्वरूप पर विद्वानों ने चर्चा की। वेद विज्ञान अध्ययन केंद्र की स्थापना के बाद वेदों एवं पुराणों में संरक्षित ज्ञान को आमजन के बीच ले जाने के लिए अध्ययन किया जाएगा। वेद विज्ञान केंद्र में प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक भवन, गुरुकुल, योगशाला, यज्ञशाला, मंदिर का निर्माण किया जाएगा। खगोलशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए यहां वेधशाला भी स्थापित की जाएगी। इसके लिए पांच एकड़ जमीन प्रदेश सरकार ने दी है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. महेंद्र पांडेय ने कहा कि वेद विज्ञान केंद्र में वेदों के मंत्रों पर शोध और अनुसंधान जरिये आम लोगों तक इसका ज्ञान पहुंचाया जाएगा। पर्यावरणविद डॉ. दयाशंकर त्रिपाठी ने कहा कि वेदों में छिपे ज्ञान को अनुसंधान के जरिये ही आमजन तक पहुंचाया जा सकता है। बीएचयू की तर्ज पर नैमिषारण्य में बनने वाले वेद विज्ञान अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र में वेद मंत्रों पर अनुसंधान व अध्ययन होंगे। इस दौरान धर्मार्थ कार्य विभाग के संयुक्त सचिव प्राणेश चंद्र शुक्ल, प्रो. चंद्रकांता राय, प्रो. राममूर्ति चतुर्वेदी, प्रो. विजय शंकर शुक्ल, सुनील कुमार वर्मा और प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने भी विचार रखे। संचालन प्रो. रामसागर मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मृत्युंजय देव पांडेय ने किया।