पॉजिटिव न्यूज
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी।
भारत और नेपाल के रिश्तों में भले ही तल्खी हो लेकिन गंगा से बागमती और काशी से नेपाल का रिश्ता कुछ अलग ही है। इस बार दीपावली पर काशी से नेपाल का एक और रिश्ता जुड़ गया। जी हां हम बात कर रहे हैं बनारसी लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं की।
लक्सा में रहने वाला प्रजापतति परिवार पांच पीढिय़ों से लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाएं बना रहा है। गंगा की माटी से तैयार प्रतिमाएं दीपावली पर घर-घर पूजी जाती हैं। इस बार दीपावली पर बनारसी लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं की सबसे अधिक मांग है। बनारस ही नहीं नेपाल तक से इस बार मूर्तियों की मांग ज्यादा है। मूर्तिकार सोमनाथ प्रजापति ने बताया कि जनवरी से ही हम लोग मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं और जुलाई में इनको अंतिम रूप दिया जाता है, इस बार कोरोना संक्रमण के कारण काम ज्यादा हो गया और दीपावली से पहले इसकी मांग भी खूब है। प्रधानमंत्री ने जब लोकल फार वोकल का नारा दिया तो हमारी मूर्तियों की मांग भी बढ़़ गई है। घर के बड़े से लेकर छोटे बच्चों तक सबकी अपनी जिम्मेदारी है जो अपने काम को बखूबी निभाते हैं। दीपावली के दो महीने पहले से ही पूर्वांचल सहित नेपाल तक इनकी डिलीवरी कराई जाती है। मूर्तियों की संख्या के बारे में पूछने पर नंदू ने बताया कि हजारों की संख्या में मूर्तियां तैयार की जाती हैं। इनकी कीमत भी 26 रुपये से लेकर 26 सौ रुपये तक होती है। नेपाल और पूर्वांचल के कई जिलों से इस बार बनारस की लोकल मूर्तियों की मांग सबसे अधिक है। बनारस में भी हमारी हजारों की संख्या में प्रतिमाएं दुकानों पर बिक रही हैं।