संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में नए सत्र में शास्त्री की कक्षाओं में दाखिले के लिए दिशा निर्देश जारी नहीं हुआ है। संबद्ध महाविद्यालय के प्राचार्य असमंजस में हैं कि नए सत्र में बिना संस्कृत वाले विद्यार्थियों का दाखिला कैसे होगा? कार्यपरिषद की संस्तुति के बाद भी अभी तक शास्त्री प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए कोई दिशा निर्देश नहीं जारी हुआ है।
नवंबर 2023 में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई विद्यापरिषद की बैठक में शास्त्री में दाखिले के लिए संस्कृत की अनिवार्यता समाप्त करने पर मुहर लगी थी। प्रवेश के नियम निर्धारण के लिए विद्या परिषद ने समिति का गठन कर प्रक्रिया को अगले सत्र से शुरू करने और एक नियम तैयार करने का निर्णय लिया था। चार महीने बीतने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए यह पहल की गई थी लेकिन चार महीने बाद भी कोई दिशा निर्देश नहीं मिलने से महाविद्यालयों के प्राचार्य असमंजस में हैं। प्राचार्यों का कहना है कि इस संदर्भ में विश्विद्यालय द्वारा अब तक कोई भी गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। मूल्यांकन शुरू हो चुका है और इसके बाद अवकाश तथा ग्रीष्मावकाश हो जाएगा। इंटर का रिजल्ट अप्रैल के अंत तक आने की संभावना है। ऐसे में नए सत्र में आने वाले विद्यार्थियों को बिना संस्कृत के कैसे दाखिला दिया जाएगा। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि सप्ताह भर के अंदर शास्त्री में दाखिले के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिया जाएगा।
बिना संस्कृत वालों को मिल सकेगा शास्त्री में दाखिला
भारतीय ज्ञान परंपरा का अधिक से अधिक लोगों को लाभ देने, संस्कृत के व्यापक प्रसार के साथ ही अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की पहल की के तहत शास्त्री कक्षा में प्रवेश के लिए आधुनिक विषय से (बिना संस्कृत) अध्ययन किए हुए विद्यार्थियों को भी प्रवेश देने का निर्णय विद्या परिषद ने लिया था। दाखिले की प्रक्रिया को शिथिल बनाने पर सर्वसम्मति से निर्णय हुआ था। इसके तहत शास्त्री प्रथम सेमेस्टर में एक अतिरिक्त संस्कृत पेपर का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।