वाराणसी। सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ के वादमित्र विजयशंकर रस्तोगी द्वारा ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण, पूजा पाठ की अनुमति दिए जाने और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा वाद मित्र बनाए जाने के अनुरोध के मुद्दे पर अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी। कोर्ट में वादमित्र की तरफ से आवेदन देकर वर्ष 1991 से लंबित इस मामले में ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने और पूजापाठ की अनुमति मांगी गई थी। जिस पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से सुनवाई के क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर और हाईकोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देते हुए आपत्ति जताई गई है। इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से विश्वनाथ मंदिर की तरफ से महत्वपूर्ण साक्ष्य देने की बात कहते हुए बीते 19 जनवरी को सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर वादमित्र के तौर पर पक्षकार बनाए जाने की गुहार लगाई गई थी। इसे लेकर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने आपत्ति जताई कि एक वादमित्र के रहते दूसरा वादमित्र नहीं रखा जा सकता। बृहस्पतिवार को अदालत ने आपत्ति प्रस्तुत करने का उभय पक्षों को अवसर देते हुए 26 फरवरी की तिथि सुनवाई के लिए तय कर दी।