स्कूल न आने वाले विद्यार्थियों के घर बुलावा टोली जाएगी। स्कूल न आने का कारण जानेगी और अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेगी। सभी परिषदीय विद्यालयों में बुलावा टोली का गठन किया जाएगा। इसमें शिक्षक के साथ छात्र भी शामिल होंगे। बुलावा टोली की हर छात्र को स्कूल लाने की जिम्मेदारी होगी।
परिषदीय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी दी गई है। बच्चे स्कूल नहीं आएंगे तो उन्हें लाने के लिए बुलावा टोली भेजी जाएगी। बुलावा टोली में स्कूल के तीन विद्यार्थी और शिक्षकों को रखा गया है। बुलावा टोली जाने के बाद भी छह दिन तक बच्चे स्कूल नहीं आए तो प्रधानाध्यापक बच्चों के घर जाकर अभिभावकों से बात करेंगे और स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। जिन बच्चों की पढ़ाई छूटेगी, उनके लिए दोबारा कक्षाएं चलाई जाएगी। बीएसए अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वह बच्चों को बुलाकर पढ़ाएं। जिससे कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रह जाए।