जिले के प्रमुख डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के लगभग 20 फीसदी पद लंबे समय से खाली हैं। अकेले यूपी कॉलेज में 25 और हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को मिलाकर शिक्षकों के 21 पद खाली हैं। सेवानिवृत्ति के साथ पद खाली होते गए, लेकिन उनके स्थान पर नियुक्तियां नहीं हुईं। लिहाजा प्रमुख कॉलेजों में कई पद पांच साल से भी अधिक समय से खाली हैं।
उदय प्रताप कॉलेज में विभिन्न विभागों में शिक्षकों के 25 पद खाली हैं। इस वर्ष वनस्पति विज्ञान विभाग, इतिहास, संस्कृत, प्राचीन इतिहास और एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स विभाग में एक-एक शिक्षकों के रिटायर होने के कारण पांच नए पद खाली हो गए। जबकि भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, समाजशास्त्र और एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स में पहले से ही एक-एक पद खाली चल रहे हैं। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों के कई पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। वर्ष 2021 में शिक्षा सेवा आयोग की ओर से कॉलेज में 27 नियुक्तियां हुईं थीं, लेकिन उसके बाद नई नियुक्ति नहीं हुई। अब भी 25 पद खाली हैं।
हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रॉस्पेक्टस में दी गई जानकारी के मुताबिक कॉलेज में शिक्षकों के कुल 21 पद खाली हैं। विधि और शिक्षा संकाय में तीन-तीन, वाणिज्य संकाय में दो और अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, आधुनिक इतिहास, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान में एक-एक शिक्षक के पद खाली हैं। इसके अलावा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में अंग्रेजी विषय में एक, बीसीए में दो और बीबीए में शिक्षकों के पांच पद खाली हैं। यही हाल काशी विद्यापीठ के मुख्य कैंपस का है। विवि के लगभग सभी विभागों में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली हैं। गेस्ट फैकल्टी के सहारे काम चलाया जा रहा है। हिंदी पत्रकारिता संस्थान में एक प्रोफेसर का पद लंबे समय से खाली है। जबकि पत्रकारिता विभाग में तीन पद खाली हैं। संस्थान के मुखिया डाॅ. नागेंद्र सिंह ने कहा कि इन विभागों में 2004-05 के बाद से ही नियुक्तियां नहीं हुईं।