ज्ञानवापी परिसर में व्यासजी के तहखाने में जिला अदालत के आदेश के बाद बुधवार देररात पूजा शुरू हो गई। कोर्ट ने दोपहर में तीस साल बाद हिंदू पक्ष को पूजा-पाठ की इजाजत दी थी। बृहस्पतिवार तड़के मंगला आरती भी हुई। पूजा-पाठ के मद्देनजर परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
तहखाने में कई प्राचीन मूर्तियां
वादी ने कहा, प्रशासन ने बाद में तहखाने का दरवाजा हटा दिया। हिंदू धर्म की पूजा से जुड़ी बहुत सी प्राचीन मूर्तियां और धार्मिक महत्व की अन्य सामग्रियां उस तहखाने में मौजूद हैं। तहखाने में मौजूद मूर्तियों की पूजा नियमित रूप से की जानी जरूरी है।
अंजुमन का दावा : तहखाने में कभी किसी ने पूजा नहीं की
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने कहा कि व्यास परिवार के किसी सदस्य ने कभी तहखाने में पूजा नहीं की। दिसंबर, 1993 के बाद पूजा से रोकने का सवाल ही नहीं उठता। उस जगह पर कभी कोई मूर्ति नहीं थी। यह कहना गलत है कि व्यास परिवार के लोग तहखाने पर काबिज थे। तहखाना मसाजिद कमेटी के कब्जे में चला आ रहा है। कमेटी ने यह भी कहा, तहखाने में किसी देवी-देवता की मूर्ति नहीं थी।
पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला
मसाजिद कमेटी ने दलील दी कि यह मुकदमा पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 से बाधित है। व्यासजी का तहखाना ज्ञानवापी मस्जिद का हिस्सा है। ऐसे में वाद सुनवाई योग्य नहीं है। इसे खारिज किया जाए। अदालत ने कमेटी की आपत्ति पर वादी पक्ष से आपत्ति मांगते हुए सुनवाई की अगली तिथि आठ फरवरी नियत की है।
ज्ञानवापी फैसले पर बोले ओवैसी
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि कोर्ट ने जो फैसला लिया है उससे पूरा मामला तय हो गया है। यह पूजा स्थल कानून, 1991 का उल्लंघन है। यह पूरी तरह से गलत है।
गौरव की अनुभूति
अदालत द्वारा पूजा की अनुमति के बाद वकील सोहन लाल आर्य ने कहा कि आज हम बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। अदालत का कल का फैसला अभूतपूर्व था। व्यवस्थाएं की गई हैं लेकिन यह (व्यास का तखना) अभी तक भक्तों के लिए नहीं खोला गया है।