45 घंटे तक अनवरत श्रद्धालुओं को दर्शन देने के बाद बाबा विश्वनाथ ने शयन आरती के बाद विश्राम किया। भक्तों ने विधि-विधान से बाबा को आरती गाकर सुलाया। महाशिवरात्रि पर मंगला आरती से शनिवार की भोग आरती तक 11 लाख 55 हजार 924 श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके साथ ही सर्वाधिक दर्शनार्थियों का रिकॉर्ड बन गया।
महाशिवरात्रि के अनुष्ठान रात्रि पर्यंत चलते रहे। मध्यरात्रि में 12:30 बजे बाबा विश्वनाथ की प्रथम प्रहर की आरती समाप्त हुई तो पूरा प्रांगण अबीर और गुलाल से लाल हो उठा था।
दूसरे प्रहर की आरती 1:30 बजे आरंभ हुई और 2:30 बजे तक अनवरत चलती रही। तीसरे प्रहर की आरती 3:30 बजे शुरू होकर 4:30 बजे तक हुई। चौथे प्रहर की आरती सुबह पांच बजे से 6:15 बजे तक हुई। श्रद्धालुओं का झांकी दर्शन भी चल रहा था।
भोग आरती के बाद महंत आवास पर बने जनवासे में बाबा विश्वनाथ की पंचबदन प्रतिमा के समक्ष विवाह के बाद होने वाले लोकाचार संपन्न हुए। शयन आरती के बाद बाबा विश्वनाथ के मंदिर के कपाट बंद हुए।