प्रधानाध्यापक सरिता राय
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प्रधानाध्यापक पद संभालने के बाद सरिता ने विद्यालय में बच्चों को परंपरागत तरीके से हटकर कुछ रोचक तरीके से बच्चों को पढ़ाने की सोची। तब से विद्यालय की प्रार्थना सभा में बच्चों को किसी ने किसी महापुरुषों के बारे में जानकारी दी जाती है। यहीं नहीं बच्चों को अच्छे नागरिक बनने का भी पाठ पढ़ाया जाता है। इसके पीछे बच्चों में कर्तव्यों व अधिकारों का भी बोध करना मुख्य उद्देश्य है।
2018 में ऐसा दिखता था प्राथमिक विद्यालय मंडुवाडीह
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प्राथमिक विद्यालय मंडुवाडीह की कक्षाएं किसी हाईप्रोफाइल कांवेंट स्कूल की तरह नजर आती हैं। स्कूल की दीवारें भी छात्रों को ज्ञान बांटती हैं। 2018 तक बदहाल स्थिति में रहने वाला यह विद्यालय पिछले तीन सालों में तेजी से विकास कर रहा है। इसकी वजह से आज ये फाइव स्टार रैकिंग में शामिल हो चुका है। बदलाव की इस बयार का ही नतीजा है कि कोरोना काल में इस विद्यालय से 15 से ज्यादा बच्चे कांवेंट स्कूल से नाम कटवाकर यहां प्रवेश ले चुके हैं।
प्रधानाध्यापक सरिता राय बताती हैं कि विद्यालय को संवारने के लिए सरकारी धनराशि के साथ अपनी सैलरी व अन्य सहयोगी शिक्षकों की मदद से विद्यालय में संसाधन जुटाए। वहीं फर्नीचर और प्रोजेक्टर की व्यवस्था उनकी खुद की बेटी और बेटे ने कर दिया। अब इस विद्यालय में बच्चों की कक्षाएं प्रोजेक्टर पर सजती हैं। गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप भी लगता है। वहीं बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं।