मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)।
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में फिलहाल मेट्रो चलाने का फैसला बदल सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मेट्रो के स्थान पर रोप- वे का इस्तेमाल करने की व्यवस्था की जाए। इससे स्पष्ट है कि वाराणसी में मेट्रो रेल परियोजना के स्थान पर किसी रोपवे या ‘लाइट मेट्रो’ रेल परियोजना शुरू की जा सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला राइट्स संस्था की अध्ययन रिपोर्ट आने के बाद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के क्रियाकलापों पर आधारित प्रजेंटेशन देखने के बाद यह निर्देश दिए। इस दौरान अधिकारियों ने कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद मेट्रो रेल परियोजनाओं की डीपीआर की प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। इस पर मुख्यमंत्री ने वाराणसी में प्रस्तावित मेट्रो रेल परियोजना के स्थान पर रोप-वे का उपयोग करने का निर्देश दिया है।
वाराणसी के लिए मेट्रो रेल परियोजना से संबंधित प्रस्ताव में बदलाव किए जाने को लेकर कोई भी अधिकारी फिलहाल मुंह खोलने से बच रहा है, लेकिन विभागीय सूत्रों के मुताबिक वाराणसी शहर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां पर मेट्रो चलाने पर संशय के बादल तो पहले ही मंडरा रहे हैं। सूत्र ने बताया कि दो-तीन दिन पहले ही राइट्स की टीम वाराणसी गई थी और वहां की स्थिति का अध्ययन कर रही है। इसलिए राइट्स की अध्ययन रिपोर्ट आने के बाद ही मेट्रो रेल या रोप-वे चलाने के मामले में अंतिम फैसला किया जाएगा।
गोरखपुर व वाराणसी में मेट्रो चलाना संभव नहीं :
विभागीय सूत्रों का कहना है कि दरअसल नई मेट्रो नीति के मानक के मुताबिक वाराणसी और गोरखपुर में मेट्रो का संचालन शुरू करना संभव नहीं है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि नई मेट्रो नीति के मुताबिक दोनों शहरो में राइडरशिप नहीं मिलने से मेट्रो का संचालन सरकार के लिए घाटे का सौदा है। इसलिए केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के स्तर पर इन दोनों शहरों में मेट्रों के स्थान पर किसी दूसरे विकल्प पर विचार किया जा रहा है।