समाज में समय के साथ विकृति आई है। उसका समाधान बहुत जरूरी है, अन्यथा यह रक्तबीज की तरह फैल जाएगी। पश्चिमी देशों का अंधानुकरण भारतीय समाज के लिए घातक है इससे बचना होगा। हमें अपने देश को शक्तिशाली बनाना होगा। अपनी विरासत को समझकर देसी व्यवस्था अपनानी होगा। हमारा आकलन पश्चिमी देश नहीं कर सकते। बीएचयू में राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी में ये बातें डाॅ. वीरेंद्र जायसवाल ने कहीं। प्रो. हेेमंत मालवीय ने बताया कि संगोष्ठी में देशभर के 105 प्रतिभागियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। वहीं, 560 शोधपत्र प्राप्त हुए जो कि यह दिखाते हैं कि भारतीय समाज इस विषय को कितनी गंभीरता से लेता है। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. अमरनाथ मोहंती, प्रो. सोनाली सिंह मौजूद रहीं। संचालन डाॅ. संजीव सराफ ने किया।