जाली नोट की तस्करी गिरोह के दो आरोपियों को यूपी एटीएस ने शनिवार को वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग स्थित सोयेपुर के पास से गिरफ्तार किया। उनके पास से 97500 रुपये के जाली नोट और बंगाल आवाजाही के विमान टिकट बरामद हुए। बांग्लादेश से फरक्का मालदा के रास्ते आकर पूर्वांचल समेत यूपी में जानी नोट खपाने की तैयारी में थे। गिरफ्तार आरोपियों में दीपक कुमार और चंदन सैनिक दोनों प्रतागपढ़ स्थित रानीगंज के निवासी हैं। आरोपियों से यूपी एटीएस पूछताछ कर रही है।
यूपी एटीएस के अनुसार सूचना मिली थी कि सड़क मार्ग के जरिये जाली नोट की तस्करी हो रही है। सुबह सात बजे पता लगा कि दो युवक जाली नोट की खेप लेकर वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग स्थित सोयेपुर में एक पीजी कॉलेज के पास मौजूद हैं। घेराबंदी करते हुए दोनों को बैग के साथ गिरफ्तार किया गया। आरोपियों में प्रतापगढ़ के कोतवाली थाना क्षेत्र के भोजपुर बरहुआ निवासी दीपक कुमार और प्रतापगढ़ के रानीगंज बाबू पट्टी स्थित आशीपुर निवासी चंदन सैनिक है।
एसटीएस के अनुसार पूछताछ में दोनों ने बताया कि वह पं. बंगाल के जाली नोट तस्करों के गिरोह के संपर्क में हैं। जाली मुद्रा बांग्लादेश में छपती है। उसे पूर्वांचल समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई करते हैं। गिरोह के मास्टरमाइंड समेत अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी दी है। आरोपी दीपक कुमार पूर्व में गांजा तस्करी में थाना मंधाता प्रतापगढ़ से और चंदन सैनिक दो बार गांजा तस्करी और वाहन चोरी में जेल जा चुका है।
व्हाट्सएप कालिंग से करते थे बातचीत
एटीएस के एक अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश से ही जाली मुद्रा मालदा, पश्चिम बंगाल के रास्ते झारखंड, बिहार और यूपी में पहुंचती है। गिरफ्तार दोनों आरोपी गिरोह के अन्य सदस्यों से व्हाट्सएप काॅलिंग के जरिए ही बातचीत करते थे। गिरोह के मास्टरमाइंड से वह कभी नहीं मिले। केवल व्हाट्सएप कालिंग से बात करते थे।
बांग्लादेश में छपती है भारतीय मुद्रा
एटीएस के अनुसार पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि भारतीय मुद्रा की प्रिंटिंग बांग्लादेश में होती है। वहीं से नोटों का बंडल अन्य राज्यों और महानगरों में पहुंचाया जाता है। पहले ट्रेन से तस्करी की जाती थी। लेकिन पकड़े जाने के भय से अब तस्करों ने नदी और सड़क मार्ग की राह पकड़ ली है। इसके पूर्व भी कई बार जाली नोट की खेप पकड़ी जा चुकी है।