वाराणसी। ट्यूबेल का मोटर जलने और चालू न होने से वरुणा पार इलाके की 2.50 लाख की आबादी पानी को तरस रही है। यह समस्या एक सप्ताह से बरकरार है, फिर जिम्मेदार सुधि नहीं ले रहे हैं। लीकेज की समस्या बनी हुई है। कुछ ट्यूबवेल खराब हैं।
शहरी जलापूर्ति सुधारने के लिए पिछले 15 वर्षों में 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो गए, लेकिन शहरवासियों की प्यास बुझाने के समुचित इंतजाम नहीं हो सका। शहर के 100 वार्डों में शायद ही कोई ऐसा इलाका है, जहां पानी से जुड़ी छोटी या बड़ी समस्या न हो। कहीं दूषित जलापूर्ति की समस्या है तो कहीं पानी न पहुंचने की समस्या है। गर्मी शुरू होने से पहले जलकल व जल निगम के अधिकारी ये दावा करते रहे कि वरुणापार व सिस वरुणा के क्षेत्रों में इस बार पानी की समस्या नहीं होगी, लेकिन इसके उलट काशीवासियों को फिर समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।
सारनाथ में 100 एमएलडी की क्षमता वाले डब्ल्यूटीपी संचालित होने के बाद भी इसका फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के पार्षद बृजेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि सांस्कृतिक संकुल का मोटर जला है। कई बार बदलने को कहा गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सारनाथ डब्ल्यूटीपी से पिछले एक सप्ताह से दिक्कत आ रही है।
जो दिक्कतें पहले की थीं, उन्हें दूर कराया जा रहा है। पानी की आपूर्ति पहले से बेहतर हुई है। वरुणा पार में कुछ खराबी आने से दिक्कत हुई थी, जिसे दुरुस्त कराया गया है। जले मोटर जल्द बदले जाएंगे। - ओपी सिंह, सचिव जलकल