स्वतंत्रता दिवस की स्मृति, संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए हाजी इश्तियाक अहमद अंसारी के औरंगाबाद आवास पर एक भव्य मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरों की शाम वरिष्ठ शायर और पत्रकार ताजुद्दीन अशअर रामनगरी को समर्पित रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनीतिक नेता अतहर जमाल लारी ने की और संचालन कवि जमजम रामनगरी ने किया। मुशायरे में बनारस और बाहर से आए शायरों ने अपना चुनिंदा कलाम सुनाया। आलम बनारसी को- क्या खबर थी गनीम की सफ में मेरा अपना ही यार निकलेगा... के लिये तारीफें मिली तो वहीं जमजम रामनगरी ने लहद में मां की तरह मुझको भींच लेती है, वतन की खाक से जब-जब भी प्यार हमने किया...लाइनों के साथ देशप्रेम को व्यक्त किया। राज बनारसी, रोशन अहमद रोशन, निजाम बनारसी और हाजी इश्तियाक अहमद ने भी अपनी गजलों और देशप्रेम से ओत-प्रोत रचनाओं से शाम को यादगार बना दिया। इस अवसर पर डॉ एम अकबर,असलम खलीफा और जुबैर आदिल सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, बुद्धिजीवी और कविता-प्रेमी मौजूद रहे। संवाद