आईएमएस बीएचयू के डेंटल फैकल्टी में ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी यूनिट में पहली बार दो मरीजों की टीएमजे आर्थोस्कोपी की गई। इनका उपचार प्रो. प्रीति तिवारी के निर्देशन में चल रहा था। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व प्रो. मंजरी मिश्रा ने किया। प्रो. तिवारी ने बताया कि पहले ऐसे मामलों में कई बार ओपन जॉइंट सर्जरी करनी पड़ती थी, जिससे सर्जरी के बाद दाग रह जाता था। टीएमजे आर्थ्रोस्कोपी एक मिनिमल इन्वेसिव तकनीक है। इसमें सर्जरी के बाद दाग लगभग न के बराबर होता है और मरीज को सामान्यतः अगले दिन ही छुट्टी मिल जाती है। प्रो. तिवारी ने बताया कि निजी अस्पतालों में टीएमजे आर्थोस्कोपी में 50 हजार से एक लाख रुपये तक का खर्च आता है। प्रो. एचसी बरनवाल ने बताया कि इस तरह की पहल विभाग की क्षमताओं को बढ़ाती है और मरीजों को इसका लाभ होगा।