,श्रीराम मंदिर गुरुधाम में चल रही श्रीराम कथा के पांचवे दिन कथा वाचक रामकमलाचार्य वेदांती ने कहा कि विद्यादान से बढ़कर और कोई दान नहीं है। अन्नदान व रुपए-पैसे का दिया गया दान मनुष्य को कुछ समय के लिए ही सुख प्रदान करता है। उन्होंने श्रीरामचरितमानस के अरण्यकाण्ड में वर्णित महर्षि अगस्त्य के शिष्य सुतीक्षण ऋषि के चरित्र का वर्णन किया। निष्काम भक्ति और परोपकार की भावना ही मनुष्य को भवसागर से पार कराती है। सांसारिक सुख क्षणिक हैं, जबकि ईश्वर भक्ति और लोक कल्याण शाश्वत हैं। इस दौरान सुबह शास्त्रार्थ प्रतियोगिता एवं सायंकाल भगवद्गीता पर श्लोक का कार्यक्रम आयोजित हुआ। संयोजन पंडित रामभरत शास्त्री ने किया।