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ASI Survey: ज्ञानवापी में औरंगजेब से पहले के प्रमाण नहीं, अकबर काल का दावा खारिज; मिले आठवीं सदी तक के साक्ष्य

Wed, 31 Jan 2024 05:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

साफ किया गया कि ज्ञानवापी में प्रारंभिक मध्यकाल से हिंदुओं से संबंधित साक्ष्य मिले हैं। मुस्लिम पक्ष औरंगजेब काल के बाद यहां आए थे। सर्वे के दौरान संरक्षित हिंदू धर्म से जुड़ी मूर्तियां, चिह्न और अन्य वस्तुओं में आठवीं शताब्दी तक के प्रमाण मिले हैं, जबकि परिसर में मुगलकाल के संरक्षित प्रमाण औरंगजेब के शासन काल या उसके बाद के हैं।
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Gyanvapi Case - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में ज्ञानवापी के अकबर काल में निर्माण के दावे को खारिज किया गया है। साफ किया गया कि ज्ञानवापी में प्रारंभिक मध्यकाल से हिंदुओं से संबंधित साक्ष्य मिले हैं। मुस्लिम पक्ष औरंगजेब काल के बाद यहां आए थे। सर्वे के दौरान संरक्षित हिंदू धर्म से जुड़ी मूर्तियां, चिह्न और अन्य वस्तुओं में आठवीं शताब्दी तक के प्रमाण मिले हैं, जबकि परिसर में मुगलकाल के संरक्षित प्रमाण औरंगजेब के शासन काल या उसके बाद के हैं।

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इस तरह मुस्लिम पक्ष की ओर से मुगल शासक अकबर के जमाने में बनी मस्जिद के दावे को एएसआई ने खारिज कर दिया है। अदालत में मुस्लिम पक्ष ने दावा किया था कि ज्ञानवापी मस्जिद मुगल सम्राट अकबर ने बनवाई थी, जबकि हिंदू पक्ष की दलील है कि औरंगजेब ने हिंदू मंदिर तोड़कर उसके ढांचे पर मस्जिद बनवाई थी।

एएसआई के 839 पन्ने की रिपोर्ट में ज्ञानवापी परिसर में मिली या दिखी एक-एक वस्तु का उल्लेख करते हुए व्याख्या की गई है। हिंदू धर्म से जुड़े शिवलिंग, मूर्तियां, अन्य प्रतीक चिह्न ज्यादातर प्रारंभिक मध्यकाल या इससे पहले के पाए गए हैं। मध्यकाल के बाद हिंदू धर्म से जुड़े चिह्न, बनावट सहित अन्य प्रमाण ज्ञानवापी में नहीं है। मुस्लिमों से जुड़े चिह्न, बनावट, सजावट मध्यकाल या उसके बाद के हैं। यहां पत्थर पर उर्दू और फारसी में खिले पत्थर सबसे पुराने मिले हैं। एएसआई की जीपीआर तकनीक से हुए सर्वे में पत्थर को औरंगजेब काल के बताए गए हैं।
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एएसआई ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पहचानने योग्य आकृतियों और अच्छी स्थिति में रखे गए टुकड़ों को अलग कर दिया गया। कुछ टुकड़े एकत्र किए गए। मलबे के ढेर में बड़ी संख्या में विभिन्न आकार की ईंटें थीं, जिनमें लखौरी ईंटें व विभिन्न आकार की टाइल्स भी शामिल थीं। इनमें से कुछ पूर्ण नमूने भी मिले।

तहखाने में पाई गई कुछ पूर्ण ईंटों पर दिनांक (स. 1881-1978) लिखा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार धातु की वस्तुओं में तांबे के सिक्कों की संख्या प्रमुख थी। ये सिक्के अलग-अलग कालखंड के हैं। फारसी में तीन सिक्कों के बारे में किंवदंती है कि इन्हें शाह आलम ने जारी किया था।

गुंबदों और दीवार की मोटाई में अंतर
जीपीआर तकनीक से किए गए सर्वे में ज्ञानवापी में गुंबद और दीवार की मोटाई में अंतर है। स्पष्ट किया गया कि दोनों निर्माण अलग-अलग कालखंड के हैं। गुंबदों के आधार पर दीवार की मोटाई 25-100 सेमी तक होती है। उत्तरी और दक्षिणी गुंबदों की दीवार की मोटाई केंद्रीय गुंबद की नींव की तुलना में कम है, जो कुछ परिवर्तनशीलता के साथ 100 सेमी मोटी है। उत्तरी और दक्षिणी गुंबद के दीवार की मोटाई ज्यादा है। छत की परत 0.5 मीटर ही मोटी है। इससे साफ है कि निर्माण में बेहद असमानता है।

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