धरती पर कोई इंसान तब तक पूर्ण इंसान नहीं बनता है, जब तक उसके हृदय में इंसानियत नहीं होती है। इंसानियत तब आती है जब व्यक्ति सत्संग रूपी तीर्थ में जाकर संत और महापुरुष के सार शब्द रूपी धारा में गोता लगाकर स्नान कर लेता है। इंसान के जीवन में सेवाभाव, परोपकार, शील, संस्कार, सुख, शांति, सादगी, मर्यादा, क्षमा, दया ही सदगुरु रूपी संपदा लेकर आता है। ये बातें जय गुरु बंदे महाराज ने सोमवार को कहीं। वह जय गुरु बंदे आश्रम छितौना जाल्हूपुर में आयोजित सत्संग में प्रवचन सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि इंसानियत एवं सद्गुणों से इंसान संसार में अपने परिवार का कार्य करते हुए देश, समाज,दीन दुखियों, दबे-कुचले हुए लोगों के हित में अपना कर्म करके इस माया की दुनिया से अमरत्व की प्राप्ति कर लेता है। संत शरण में जो गया वह इंसान बन गया। इस दौरान महंत रमेश दास, अद्भुत दास, राकेश सिंह, विजय कांत सिंह, बच्चा पाठक उपस्थित रहे।