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Varanasi News: गंगा किनारे से महज 650 मीटर अंदर ही आबाद थी टेंट सिटी

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वाराणसी। गंगा पार रेती पर जगह-जगह पक्के निर्माण, कहीं टैंक तो कहीं जमीन से दो फीट ऊपर निकली हुई पाइप अब भी नजर आ रहे हैं। गंगा किनारे से मात्र साढ़े छह सौ मीटर की दूरी पर यह निर्माण टेंट सिटी हटने के बाद ऐसे ही छोड़ दिए गए हैं। टेंट सिटी बसाने वाली कंपनियों ने गंगा की धारा से केवल 60 मीटर दूरी पर ही टेंट सिटी आबाद कर दी थी।
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गंगा पार रेती पर तलहटी का इलाका रामनगर से प्रह्लाद घाट तक है। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने गंगा पार रेती पर टेंट सिटी की पड़ताल की। गंगा की धारा से जब टेंट सिटी की दूरी नापी गई तो यह महज 60 मीटर थी। टेंट सिटी को हटाने के बाद सभी पक्के निर्माण को यथावत छोड़ दिया गया है। कहीं चहारदीवारी, तो कहीं चैंबर, तो कही टैंक, पिलर की सरिया और पाइप लाइन बिछी हुई है। 11 हेक्टेयर के इलाके में जगह-जगह छोटे-छोटे पक्के निर्माण ऐसे ही छोड़े गए हैं। गंगा पार रेती पर टहलने वालों के लिए यह खतरनाक भी है।
राजघाट से रामनगर तक का इलाका गंगा का नदी तल है। इसी इलाके में गंगा की रेत जमा होती है और इसे कछुआ सेंचुरी भी घोषित किया गया था। गंगा के जलीय जीवों का यह स्थान है और साइबेरियन पक्षी भी इसी रेत में अपने अंडे भी देते हैं। केवल रामनगर से राजघाट तक गंगा की धारा किनारे से सात सौ मीटर दूर बह रही है। बाढ़ और बरसात के दिनों में यह पूरा इलाका पानी से भर जाता है।
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शासन ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में रोजाना के हिसाब से 12 हजार पांच सौ रुपये का जुर्माना दोनों टेंट कंपनियों पर लगाया है। एनजीटी ने कहा था की संयुक्त समिति की 24 मई की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो चुका है कि टेंट सिटी का निर्माण गंगा नदी तल में हुआ है। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि थोड़ा सा गंगा नदी का पानी कम हुआ और नदी में टेंट सिटी लगा दी। एनजीटी ने वाराणसी विकास प्राधिकरण को विलेन भी कहा था और जुर्माना लगाने की बात कही थी। हालांकि 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई में वीडीए और टेंट कंपनी ने अगली तारीख मांगी थी। एनजीटी ने 15 दिसंबर की तारीख तय की है।

किसी को नहीं है अधिकार तलहटी में निर्माण का
गंगा अथाॅरिटी 2016 के अनुसार यह नियम है कि गंगा की तलहटी में कोई भी स्थायी या अस्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह किसी को अधिकार नहीं की वह नदी तल में टेंट सिटी अथवा कोई स्थायी अथवा अस्थायी निर्माण कर ले और न ही इसकी अनुमति दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान एनजीटी द्वारा गंगा नदी क्षेत्र में टेंट सिटी बसाने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया तो किसी के पास इस बात का जबाब नहीं था।
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