संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के अनुसार शास्त्री और आचार्य के पाठ्यक्रम अपडेट होंगे। कुलपति के निर्देश पर समिति का गठन कर दिया गया है। यह जानकारी जनसंपर्क अधिकारी शशींद्र मिश्र ने दी। कुलपति प्रो. आलोक कुमार ने बताया कि दो दिन पहले संकायाध्यक्षों की कमेटी बनाई गई है। समिति नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों को तैयार कराएगी। यहां शास्त्री तीन और चार वर्ष का होगा। विद्यार्थी को उसके समय और सुविधा के अनुसार प्रत्येक वर्ष का क्रमश: प्रमाण पत्रीय डिप्लोमा, डिप्लोमा और डिग्री की उपाधि प्राप्त होगी। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत पाठ्यक्रमों का नवीनीकरण शैक्षिक सत्र 2021-22 में आरंभ करने के लिए कटिबद्ध है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा अनेकों बदलाव किये गये हैं । शिक्षकों के गुणवत्ता के स्तर को भी बढ़ाने के लिये कई प्रावधान किये गये हैं। वहीं, प्रमुख विभाग साहित्य, व्याकरण, वेद, वेदान्त,ज्योतिष, पुराण, दर्शन, योग, पाली, प्रकृति, बौद्ध आदि के साथ-साथ यहां पर आधुनिक विषयों में शिक्षा शास्त्र, पत्रकारिता, विज्ञान, गृह विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, भाषा विज्ञान और विदेशी भाषाओं सहित अनेक विषयों को भी पढ़ाया जाता है।