श्रीराम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। मन को शुद्ध करती है। पापों का नाश करती है और मर्यादा व धर्म का मार्ग दिखाती है। इससे व्यक्ति के लोक और परलोक दोनों सुधरते हैं। ये विचार दुर्गा मंदिर दुर्गाकुंड के महंत पं. रमेश महाराज ने व्यक्त किए। वह शुक्रवार को मंदिर प्रांगण में आगामी फरवरी माह में आयोजित होने वाले 26वें चंडी महायज्ञ के निमित्त श्रीराम कथा प्रसंग सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि यह भक्ति, शांति और दिव्य आनंद का स्रोत है, जहां हनुमान जी स्वयं उपस्थित होते हैं और भक्तों के सभी विकार दूर करते हैं। कथा का श्रवण मात्र ही जीवन को पवित्र कर देता है और आत्मा के उद्धार का माध्यम बनता है,जो मनुष्य जीवन की दुर्लभता को सार्थक करता है। इस अवसर पर नीरज उपाध्याय, रिशु गिरि, संजय अग्रहरि व अजय गोयल उपस्थित थे।