भक्ति मानव जीवन का सर्वाेच्च तत्व है। यह पापों का नाश करती है और मनुष्य को जीवन में सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त करने की क्षमता प्रदान करती है। मनुष्य अत्यंत अभागा है, जिसके जीवन में भक्ति का स्थान नहीं होता। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मन को शांति, चित्त को स्थिरता और आत्मा को आध्यात्मिक बल मिलता है। यह विचार कथा आचार्य तुंगनाथ त्रिपाठी ने बुधवार को करौंदी स्थित महामना नगर कॉलोनी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाली कला है। जोकि जाति-धर्म से ऊपर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है और मोक्ष तक पहुंचाती है। व्यासपीठ का पूजन और आरती जामवंती देवी ने किया।