श्रेष्ठ साहित्य सृजन की आधार भूमि साहित्यिक पर्यावरण है। इस दिशा में साहित्यकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह विचार साहित्यिक संघ की ओर से बुधवार को ईश्वरगंगी में आयोजित हिंदी साहित्य में पर्यावरण विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने रखे। मुख्य अतिथि दयानिधि मिश्र ने साहित्यिक पर्यावरण के निर्माण का आह्वान किया। डॉ. रामसुधार सिंह ने ठाकुर प्रसाद सिंह के योगदान पर चर्चा की। प्रो. इंदीवर पांडेय, प्रो. श्रद्धानंद ने साहित्यिक संघ की सुदीर्घ परंपरा को याद किया। साहित्यिक पर्यावरण रचने में डाॅ. जितेंद्रनाथ मिश्र की सकारात्मक भूमिका का उल्लेख किया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जितेंद्रनाथ मिश्र ने कहा नई पीढ़ी को चाहिए वह साहित्यिक वातावरण को प्रदूषित होने से बचाएं। मनोज वर्मा, सरदार सरबजीत सिंह, पवन कुमार शास्त्री, मनीष खत्री, सीए मनोज श्रीवास्तव ने भी विचार रखे। स्वागत सोच विचार पत्रिका के संपादक नरेंद्रनाथ मिश्र, संचालन हिमांशु उपाध्याय और धन्यवाद ज्ञापन बासुदेव ओबेरॉय ने किया। संवाद