संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रविवार को परशुराम जयंती मनाई गई। संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि परशुराम का जीवन नैतिकता, पारदर्शिता, जनकल्याण का भाव सिखाता है। इसको जीवन में आत्मसात करना होगा। भगवान परशुराम का जीवन केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि समकालीन समाज के लिए एक सशक्त नैतिक-दर्शन प्रस्तुत करता है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था। वर्तमान समय में, जब समाज विभिन्न प्रकार की विषमताओं, नैतिक चुनौतियों और मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, तब भगवान परशुराम का आदर्श मार्गदर्शक बनकर सामने आता है। उधर, काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय धर्म जागरण प्रमुख अभय, मौनी बाबा पीठ के पीठाधीश्वर सत्यानंद यति महाराज ने परशुराम के जीवन चरित्र की चर्चा की। अध्यक्षता पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रो. नागेंद्र सिंह ने की। इस दौरान राकेश तिवारी, अरविंद शुक्ला, युवराज पांडेय, समीर मिश्रा आदि मौजूद रहे।