राजर्षि उदय प्रताप सिंह जूदेव ने कहा था कि हमें अपने मस्तिष्क से इस बात का कभी भी विस्मरण नहीं होने देना चाहिए कि हम न केवल राम और बुद्ध की जन्म भूमि पर पैदा हुए हैं, बल्कि हमारी धमनियों में उन्हीं के रक्त का संचार हो रहा है, एक ने अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक राज्य सुख का परित्याग पिता और राजा की आज्ञानुसार किया।
वहीं, दूसरे ने विश्व-शांति और मानव प्रेम का संदेश देने के लिए महत्तम त्याग किया। उदय प्रताप कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि इंडियन काउंसिल एक्ट 1892 द्वारा ही भारतीयों को पहली बार काउंसिल के अंदर प्रश्न करने का अधिकार ब्रिटिश सरकार ने प्रदान किया था।
भारत के संसदीय इतिहास में यह दर्ज है कि पहला प्रश्न राजा उदय प्रताप सिंह भिनगा स्टेट ने ही काउंसिल के सदस्य की हैसियत से किया था। रसद पहुंचाने में गरीब जनता को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था जिसका वर्णन राजर्षि ने अपने पहले प्रश्न में किया था। उन्होंने यह प्रथा बंद करने के लिए आवाज उठाई थी।
यह प्रश्न उठाए जाने के बाद प्रथा में आवश्यक संशोधन भी किए गए थे। ब्रिटिश भारत में राजद्रोह कानून पर उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी थी। जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता और स्वाधीनता के बारे में विचार व्यक्त किए गए थे। बाद में राजर्षि जी के परामर्श के अनुसार उस समय आवश्यक संशोधन भी किया गया था।
भिनगा के राजा के घर हुआ था जन्म
यूपी कॉलेज के संस्थापक राजा उदय प्रताप सिंह जूदेव का जन्म तीन सितंबर सन 1850 में भिनगा के राजा कृष्ण दत्त सिंह के घर हुआ था। राजर्षि जब 12 वर्ष के थे तभी इनके कंधों पर राज्य का भार आ गया था।