बीएचयू के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में दूरबीन विधि से इलाज की सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत होगी। पोयम विधि में सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। बीएचयू में इसकी शुरुआत हो गई है। विभाग के चिकित्सकों को भी जानकारी दे दी गई। दो दिन पहले एक मरीज की खाने की नली रुक गई थी, उसका इसी विधि से इलाज किया गया।
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन शंखवार ने दो दिन पहले ही इंडोस्कोपी विधि (पोयम) द्वारा इलाज से जुड़ी कार्यशाला का शुभारंभ कर मरीजों को जागरूक किया। साथ ही विभाग के अध्यक्ष डॉ. देवेश यादव के प्रयास की सराहना की। डॉ. देवेश ने बताया कि खाने की नली की बीमारी (एकलेजिया कार्डिया) जिसमें मरीज को खाना खाने और पानी पीने में दिक्कत होती है, उसका इलाज दूरबीन विधि से किया गया। पोयम का लाभ यह है कि इसे बार-बार नहीं करना पड़ता है। मरीज 24 घंटे में घर जा सकता है। निजी अस्पताल में इस प्रकिया का खर्च करीब एक से डेढ़ लाख रुपये है जबकि बीएचयू में यह प्रक्रिया पहली बार की गई है। यह सुविधा शुरू होने पर नई दिल्ली से डाॅ. विकास सिंगला, बीएचयू से प्रो. वीके दीक्षित, डॉ. एसके. शुक्ल, डॉ. विनोद कुमार, डाॅ. अनुराग तिवारी, प्रो. सरोज चूणामणि गोपाल, डाॅ. मुमताज अंसारी ने सराहना की है।