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काशी के कोतवाल काल भैरव महोत्सव का पांचवां दिन: यज्ञ में डालीं गयीं आहुतियां, बही हास्य रस की गंगा

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श्रीकृष्णगिरी पीठाधीश्वर डॉ. बसंत विजय महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति में विधि नहीं विधि का ज्ञान फलित करता है। इसलिए विधि के विवेक को समझना जरूरी है। भक्ति को स्वीकार करने से ही कल्याण संभव है।
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वह रविवार को रामनाथ चौधरी लान में काशी कोतवाल काल भैरव महोत्सव के पांचवें दिन प्रवचन दे रहे थे। डॉ. बसंत विजय महाराज ने कहा कि किसी भी वस्तु का हाथ लगना महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि उसका उपयोग किस प्रकार से हो रहा है यह अति महत्वपूर्ण है। लक्ष्य निर्धारित कर जीवन जीने की सीख देते हुए कहा कि हर वस्तु में भावना होती है यह विज्ञान ने सिद्ध किया है। पूजा, जप, साधना, आराधना के क्रम में भैरव भक्ति के पांचवें दिन शाम को हवन यज्ञ में आहुतियां दी गईं।
बही हास्य रस की गंगा
रविवार को रात्रि के सत्र में विराट हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, हरिओम पवार, अरुण जेमिनी, शशिकांत यादव, शंभू शिखर, गौरव शर्मा सरीखे अनेक कवियों ने अपनी हास्य एवं वीर रस की विविध रचनाओं से श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। हास्य रस की गंगा में मध्य रात्रि तक श्रोता गोते लगाते रहे।
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