जयरामपुर में चल रही श्रीरामकथा के चौथे दिन दिन बुधवार को अचलानंद महाराज ने भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग, परशुराम-लक्ष्मण संवाद, सीताराम विवाह एवं विदाई प्रसंग की भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा और वीरता के भाव से ओतप्रोत कर दिया। प्रसंगों पर सजी झांकियों में जब सियाजी के हाथों प्रभु श्रीराम को जयमाल पहनाई गई तब सिया जू के हाथे जयमाल हो, मंगल गीत गावैं सब सखियां... की प्रस्तुति हुई। सीताराम विवाह से जनकपुर में आनंद छा गया, लेकिन जैसे ही माता सीता की विदाई का मार्मिक भाव से सभी में करुणा भर उठा। श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण हुआ।