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Varanasi: बीएचयू की प्रयोगशाला में होगा असली और नकली रत्नों का परीक्षण, UP का होगा पहला सेंटर

Wed, 12 Apr 2023 08:07 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बीएचयू की प्रयोगशाला में जल्द ही रत्नों का परीक्षण होगा। अभी तक ऐसी प्रयोगशालाएं मुंबई, सूरत और अहमदाबाद में हैं। बीएचयू के विज्ञान संस्थान के निदेशक और साथी के समन्वयक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि यह पहली बार है कि देश के इस हिस्से में रत्न परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित हो रही है। 
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बीएचयू में होगा रत्नों का परीक्षण - फोटो : iStock
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विस्तार
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की प्रयोगशाला में जल्द ही रत्नों का परीक्षण होगा। आम जनता के साथ ही रत्न उद्योग से जुड़े लोगों को असली व नकली की पहचान हो सकेगी। भारत सरकार के साथी कार्यक्रम के तहत सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर में अत्याधुनिक रत्न परीक्षण और अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। अभी तक ऐसी प्रयोगशालाएं मुंबई, सूरत और अहमदाबाद में हैं।

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पूर्वी उत्तर प्रदेश में रत्न परीक्षण की कहीं भी इस तरह की सुविधा नहीं है। लंबे समय से आधुनिक व भरोसेमंद प्रयोगशाला की आवश्यकता थी। इसी क्रम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा स्वीकृत सोफिसटिकेटेड एनालिटिकल एंड टेक्निकल हेल्प इंस्टीट्यूट (साथी) योजना के तहत मिले अनुदान से दूसरे चरण में इसे स्थापित किया जा रहा है।

योजना पर 3.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं। इसमें फोरियर ट्रांसफॉर्मेशन इंफ्रा रेड (एफटीआईआर) लेजर रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी, एनर्जी डिस्पर्सिव एक्सरे फ्लोरेंस स्पेक्ट्रोमीटर (ईडीएक्सआरएफ), टेबल टॉप एक्सआरडी, यूवी-विज-एनआईआर स्पेक्ट्रोमीटर, दूरबीन, ध्रुवीकरण माइक्रोस्कोप एवं लेजर कटर जैसे आधुनिक उपकरण हैं। प्रत्येक उपकरण रत्न के विभिन्न पहलुओं जैसे संरचना, रसायन, रंग और समावेश की पहचान करेंगे।
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 27 को भूविज्ञान विशेषज्ञ करेंगे संवाद

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू के विज्ञान संस्थान के निदेशक और साथी के समन्वयक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि यह पहली बार है कि देश के इस हिस्से में रत्न परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित हो रही है। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि गुणवत्ता परीक्षण और रत्नों के व्यापार से जुड़े विविध विषयों व चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने व प्रयोगशाला के माध्यम से प्रभावी समाधान खोजने के उद्देश्य से उद्योग प्रतिनिधियों व बीएचयू के भूविज्ञान विशेषज्ञों के एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन 27 अप्रैल को किया जा रहा है।
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