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दस रुपये का टकट बना हादसे का सबब

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औराई/घोसिया (भदोही)। नरथुआ दुर्गा पूजा पंडाल में लापरवाही की वजह से ही आग लगी थी। जानकारी मिली है कि आयोजकों ने मुख्य गेट से पूजा पंडाल में प्रवेश और निकासी के लिए दो रास्ते के अलावा एक रास्ता ऐसा भी बनाया था, जिससे अंदर जाने के लिए दस रुपये का टिकट रखा गया था। टिकट लेकर तीसरे मार्ग से अंदर जाने वाले लोग शो चलने वाले स्थान पर सबसे आगे पहुंच रहे थे। शो खत्म होने पर निकासी के रास्ते निकल रहे थे।
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नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि पूजा पंडाल में जब आग लगी तो चारों तरफ अफरातफरी मच गई। पंडाल में प्रवेश और निकासी के लिए बैरिकेडिंग कर रास्ता बनाया गया था। उसी में एक ऐसा रास्ता था, जिसमें टिकट के जरिये प्रवेश दिया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आग लगी तो लोग भागने लगे। टिकट लेने वालों के लिए दूसरी तरफ से निकलने का अलग रास्ता न होने से लोग वह एक-दूसरे को कुचलते हुए निकल रहे थे। इसी के चलते कई लोग इसमें फंस गए। पंडाल के अंदर जहां शो चल रहा था, वहां पैसा देकर अंदर जाने वाले लोग सबसे आगे थे, उनके लिए निकलना ज्यादा मुश्किल साबित हुई और ज्यादातर अंदर ही फंस गये। झुलसने वालों में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है।
अंदर जाने के बाद ले ली जाती थी पर्ची
एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसने खुद दस रुपये देकर पर्ची खरीदी थी। जब उससे वह पर्ची मांगी गई तो उसने बताया कि पंडाल के बाहर एक टेबल पर जय माता दी लिखी हुई पर्ची मिलती थी। जिसे पंडाल के अंदर घुसते ही समिति के दूसरे सदस्य उसे ले कर प्रवेश देते थे। पर्ची वाले लोगों को पंडाल के मुख्य गेट पर बने बीच वाले रास्ते से इंट्री दी जाती थी, जो शो चलने के दौरान सबसे आगे होते थे। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने स्पष्ट किया है कि फाइनल रिपोर्ट आने के बाद दोषी लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में आयोजक प्रदीप यादव उर्फ बच्चा और पांच अज्ञात पर मुकदमा दर्ज है।
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घटना के बाद देवदूत बने डॉ. योगेश
औराई/घोसिया। दुर्गा पूजा पंडाल में जब आग लगी तो लगभग 80 से 90 लोग झुलस चुके थे। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए अंदर से झुलसे लोगों को निकालना आरंभ किया। किसी ने बाइक से तो किसी ने अन्य वाहनों से झुलसे लोगों को नजदीकी चिकित्सालयों में भेजवाना शुरू किया। अस्पतालों में गंभीर रूप से झुलसे लोगों को डॉक्टर वाराणसी के लिए रेफर कर रहे थे। ऐसे समय में स्थानीय चिकित्सक डॉ. योगेश कुमार सिंह देवदूत बनकर सामने आए। तबतक जिले की एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंच चुकीं थीं। उन्होंने वाराणसी के डॉक्टर मित्रों से संपर्क कर 10 एंबुलेंस मंगाई और उसकी मदद से 15 से 20 मरीजों को अस्पताल भेजा। हालांकि उसके बाद जिला प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया और जनपद सहित मिर्जापुर से भी एंबुलेंस मंगाई गईं।
औराई/घोसिया। अग्निकांड से पूरा जनपद मर्माहत है। इसमें कई लोगों से उनके अपने छिन गए। वहीं कई का इलाज भी चल रहा है। इस हादसे में गांव के ही वीआर कॉन्वेट इंग्लिश स्कूल के छह बच्चे झुलस गए हैं। जिनका बनारस और औराई के विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। स्कूल के प्रबंधक रामदेव यादव ने इन सभी बच्चों की एक साल की फीस माफ कर दी है। इसके अलावा एक झुलसी महिला का भी आर्थिक सहयोग किया।
ज्ञानपुर। औराई के नरथुआ के पूजा पंडाल में दो अक्तूबर की वह काली रात छह गांव के लिए किसी दु:स्वप्न से कम नहीं है। भीषण अग्निकांड में अपनों को गंवा चुके परिवारों के लिए इस हादसे को भूलना काफी कठिन है। करीब 77 झुलसे लोगों में अब तक 15 जिंदगी की जंग हार चुके हैं, जबकि कई संघर्ष कर रहे हैं। घटना में सबसे अधिक क्षति सहने वाले पूर्व प्रधान रमापति के बेटे स्व. अवधेश का तो पूरा कुनबा ही खत्म हो चुका है। जबकि उमेश के दो बच्चों की मौत हुई है।
शारदीय नवरात्रि की सप्तमी को हुए भीषण अग्निकांड में 15 गांव के लोग प्रभावित हुए हैं। इसमें सबसे अधिक पुरुषोत्तमपुर, बारिगांव, जेठूपुर, औराई, औराई राजापुर, औराई खगना के करीब 77 महिला, पुरुष और बच्चे झुलसे हैं। अब तक जान गंवाने वाले 15 लोग इन्हीं गांवों के रहने वाले थे। परिवार के छह सदस्यों को गंवाने वाले पूर्व प्रधान रमापति की आंखें तो पथरा गईं हैं। उन्हें सबसे अधिक दु:ख है कि पांच साल पूर्व मिर्जापुर में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बेटे अवधेश का पूरा वंश ही खत्म हो गया। अवधेश का बेटा सुजल, बेटी प्रियल, पत्नी सीमा ने इस अग्निकांड में दम तोड़ दिया है। बुधवार को भी बारी गांव स्थित घर पर सन्नाटा पसरा रहा। ग्राम प्रधान राम सहाय और सुभाष कन्नौजिया का कहना है कि यह अग्निकांड औराई के लिए एक दु:स्वप्न बन गया है। जिसको दशकों तक भूलना मुश्किल है। (संवाद)
ज्ञानपुर। पूजा पंडाल में लगी आग के पीड़ितों की सहायता के लिए लोकतंत्र सेनानी संघ ने राजकीय सम्मान की राशि से एक-एक हजार रुपये देने का ऐलान किया है। संघ के सदस्यों ने इस हादसे में मृतकों के परिजनों के प्रति शोक संवेदना जताई हैं। जिलाधिकारी गौरांग राठी को सौंपे पत्रक में उन्होंने आग्रह किया कि सितंबर माह में सम्मान स्वरूप मिलने वाली राशि से एक-एक हजार रुपये अग्निकांड में पीड़ितों के लिए उपचार के लिए काट लिए जाएं।
औराई। अग्निकांड में झुलसी औराई निवासी महेंद्र की 30 वर्षीय पत्नी रजनी रानी को बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल से सूर्या ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट किया गया। गौरतलब है कि मंगलवार की शाम ही तमाम लोगों ने बनारस के हॉस्पिटल में अच्छा इलाज न होने का आरोप लगाकर चक्काजाम किया था। जिसके बाद मौके पर पहुंचे सीडीओ भानु प्रताप और एडिशनल एपी राजेश भारती ने भर्ती मरीजों के स्वजन को उनकी इच्छा अनुसार हॉस्पिटल में शिफ्ट करवाने का आश्वासन दिया था। जिसके बाद बुधवार को रजनी रानी को पंडित दीनदयाल से औराई स्थित सूर्या ट्रामा सेंटर शिफ्ट किया गया।
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