आराजीलाइन ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय लहिया में सहायक अध्यापक अजय सिंह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को सफलता की राह दिखा रहे हैं। नवोदय विद्यालय में प्रवेश की परीक्षा हो या फिर विद्याज्ञान की या फिर राष्ट्रीय आय छात्रवृत्ति परीक्षा, अजय स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ ही ऑनलाइन तैयारी कराते हैं। हाल ही में अजय की कक्षा में पढ़ने वाली आटो चालक की बेटी का प्रवेश विद्याज्ञान स्कूल में हुआ है। साल 2021 में भी अजय के एक छात्र ने नवोदय विद्यालय की परीक्षा उत्तीर्ण कर थी। बच्चों को संसाधन मुहैया कराने के लिए अजय सामाजिक संस्थाओं से भी मदद लेते हैं।
दीप 30 के वीरभद्र सिंह
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सुपर 30 की तर्ज पर काशी के युवाओं ने दीप 30 के नाम से एक अभियान चलाया है। युवाओं ने इससे गरीब और प्रतिभावान छात्रों की मदद करने का संकल्प लिया है जो भविष्य में आईएएस, पीसीएस या दूसरे क्षेत्रों में अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं। इस पहल में आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर समेत कई शिक्षाविदों का भी साथ मिल रहा है। वीरभद्र सिंह, विनीत सिंह, शुभम मिश्रा और रश्मि सिंह बीएचयू में अलग-अलग विभागों में पढ़े और अब सिविलि सर्विसेज की तैयारी करते हैं। ये युवा न सिर्फ खुद तैयारी कर रहे हैं बल्कि ऐसे छात्रों की मदद भी कर रहे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
प्रधानाचार्य प्रीति त्रिवेदी
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पिंडरा ब्लॉक के नेहिया गांव निवासी श्वेता दूबे के जीवन में शिक्षक प्रीति त्रिवेदी ने न सिर्फ आत्मविश्वास भरा बल्कि शिक्षा का उजाला भी किया। स्कूल की दहलीज पर पांव रखते ही बीमारी के कारण अपने आंखों की रौशनी खो चुकी श्वेता को कभी नहीं लगा था कि वो दसवीं की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर सकेंगी।
लेकिन कंपोजिट विद्यालय महमूरगंज में कार्यरत प्रधानाध्यापक प्रीति द्विवेदी ने उसे फोन पर ऑडियो के माध्यम से पढ़ाकर उसके अंधेरे जीवन में उम्मीद की एक किरण दे दी है। प्रीति बताती हैं श्वेता के अंदर पढ़ाई की ललक देखकर ही शिक्षा विभाग में कार्यरत जिला समन्वयक ने उसका दाखिला कस्तूरबा विद्यालय में करा दिया था।