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Varanasi News: किताबी ज्ञान के साथ सीपीआर देने का तरीका सीखेंगे छात्र

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इंटर कॉलेजों के विद्यार्थी किताबी ज्ञान के साथ-साथ अब जान भी बचा सकेंगे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम विद्यार्थियों के बीच जाकर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आने पर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) से जान बचाने का प्रशिक्षण देगी। कार्डियक अरेस्ट से मौत के बढ़ते मामलों को देख अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से आरबीएसके की टीम चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दे रही है। सोमवार को सीएमओ कार्यालय में डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर ईसीजी और थ्रंबोलिसिस की सेवाएं पहले से दी जा रही हैं। सीएमओ डाॅ. संदीप चौधरी ने बताया कि आरबीएसके की टीम विद्यालयों में जाकर 11वीं व 12वीं के छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण देगी। ताकि कार्डियक अरेस्ट आने पर किसी की भी जान बचाई जा सके। बिजली का झटका, पानी में डूबने, दम घुटने, सांस लेने में दिक्कत, बेहोश होने पर भी सीपीआर की मदद से जान बचाई जा सकती है। इस दौरान एसीएमओ डॉ. एके मौर्य, चिकित्साधिकारी डॉ. अतुल सिंह मौजूद रहे।
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ये है सीपीआर
डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि सीपीआर के समय दोनों हाथों की मदद से एक मिनट में 100 से 120 बार छाती के बीच में दबाव डालना होता है। एक एक दबाव के बाद छाती को वापस अपनी सामान्य स्थिति में आने देना चाहिए। इसके साथ ही 30 बार छाती पर दबाव के उपरांत दो बार मुंह से सांस भी दिया जाता है।
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