बीएचयू की शास्त्रीय संगीत कार्यशाला में विद्यार्थियों को राग, बंदिश, लयकारी, आलाप और तान का रियाज कराया गया। शु्क्रवार को संगीत एवं मंच कला संकाय के पं. लालमणि मिश्र सभागार में कार्यशाला की शुरुआत में शास्त्रीय संगीत विधाओं से हुई। गायन विशेषज्ञ और फ्लेम विश्वविद्यालय पुणे के प्रो. समीर दुबले ने कई शैलियां सिखाईं। उनकी प्रस्तुति-पद्धति, संरचना, राग-विस्तार, बंदिश, लयकारी और व्यवहारिक पक्षों के बारे में बताया। कौस्तुभ जयंती समारोह के मौके पर चल रहे इस कार्यक्रम में प्रो. समीर दुबले ने झपताल में निबद्ध राग दिन की पुरिया की बंदिश पेश की। बोल थे- कैसे ये नी लागे सांझ सुहावन, सुन पी के आवन की बात और एकताल द्रुत में निबद्ध बंदिश भरन गगर ना देत, ऐसों ढीठ लगर, घर जाने दे मोहे सांझ भई... को गाकर छात्रों को रियाज कराया। उन्होंने राग-विस्तार, स्वर-साधना, आलाप, तान और लयकारी की बारीकियों को गाकर समझाया। हारमोनियम पर डॉ. विजय कपूर और तबले पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती ने संगत की।