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Varanasi News: 48 दिन में जमींदोज हो गया 63 साल का अतीत

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उत्तर रेलवे प्रशासन से विवाद के बीच 48 दिनों में ही सर्व सेवा संघ की 63 वर्ष पुरानी विरासत जमींदोज हो गई। राजघाट स्थित संघ की स्थापना 1960 में हुई थी। 26 जून 2023 को जिलाधिकारी कोर्ट ने रेलवे के हक में फैसला सुनाया और संघ भवन, परिसर को खाली करने का नोटिस चस्पा कर दिया गया। फिर परिसर खाली कराकर शनिवार (12 अगस्त) को बुलडोजर चला दिया गया।
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देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, आचार्य विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण और डॉ. संपूर्णानंद जैसी नामचीन हस्तियों की पहल पर सर्व सेवा संघ की शुरुआत अप्रैल 1948 में की गई थी। राजघाट पर 1960 में सर्व सेवा संघ का परिसर अस्तित्व में आना शुरू हुआ। इस बीच राजघाट स्थित जमीन के मालिकाना हक को लेकर उत्तर रेलवे और सर्व सेवा संघ के बीच अदालती लड़ाई शुरू हो गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वाराणसी के जिलाधिकारी विवाद का निपटारा करें। बीते 26 जून को जिलाधिकारी एस. राजलिंगम की कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार जिस जमीन पर सर्व सेवा संघ काबिज है, वह रेलवे की है। 27 जून को ही उत्तर रेलवे प्रशासन ने भवन खाली करने का नोटिस चस्पा कर दिया। रेलवे ने जिलाधिकारी कोर्ट के आदेश के का हवाला दिया और कहा कि 30 जून को सर्व सेवा संघ के अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाएगा। इसके खिलाफ सर्व सेवा संघ ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। पहले हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोई राहत नहीं मिल सकी। 22 जुलाई को सर्व सेवा संघ परिसर स्थित भवनों को खाली करा दिया गया। अब रेलवे प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर निर्माण ध्वस्त करा दिया।



गांधी विद्या संस्थान पहले ही हाथ से गया
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्ष 1963 में जयप्रकाश नारायण की पहल पर राजघाट स्थित परिसर में गांधी विद्या संस्थान की स्थापना की गई थी। इसका उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने किया था। वर्ष 1998 में शुरू हुए विवाद की वजह से गांधी विद्या संस्थान बंद चल रहा था। मार्च 2023 में अचानक उसका ताला खुलवा कर उसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अधीन कर दिया गया।
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स्थापना के 75 साल पूरे कर रहा सर्व सेवा संघ



अखिल भारत चरखा संघ, अखिल भारत ग्रामोद्योग संघ, अखिल भारत गो-सेवा संघ, हिंदुस्तानी तालिमी संघ, सेवाग्राम आश्रम और महारोगी सेवा समिति के विलय के बाद अस्तित्व में आया सर्व सेवा संघ इस वर्ष अपनी स्थापना के 75 साल पूरे कर रहा है।

दिग्गजों का विरोध काम नहीं आया
सर्व सेवा संघ परिसर व उसके भवन को बचाने के लिए दिग्गजों ने मोर्चा संभाला। दिल्ली से वाराणसी तक लड़ाई लड़ी, लेकिन कुछ हाथ नहीं आया। बृहस्पतिवार को ही सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर, किसान नेता राकेश टिकैत और संदीप पांडेय वाराणसी आए। संघ के बचाव में प्रदर्शन किया और बड़ा आंदोलन छेड़ने की हिदायत दी, लेकिन नतीजा सकारात्मक नहीं आया। जेएनयू के शिक्षक, गांधीवादी, समाजवादी चिंतक भी पक्ष में आए। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन जमीन पर कब्जा लेने में कामयाब हुआ है।
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