नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में संस्कृत के पारंपरिक विषयों को शामिल नहीं करने पर बीएचयू के छात्रों ने शनिवार को जमकर हंगामा किया। परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में घुसकर नारेबाजी की और विषयों को शामिल करने की मांग उठाई। छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक का इस्तीफा मांगते हुए चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह आंदोलन करेंगे।
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संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्र परीक्षा नियंत्रक कार्यालय पहुंचे। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय बीएचयू का महत्वपूर्ण भाग है। इसकी स्थापना महामना ने भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और ज्ञान परंपरा के अध्ययन व अनुशीलन के लिए की थी। इसके तहत आठ विभागों में 200 से अधिक शोधार्थी शोध कर रहे हैं। पिछले दिनों विश्वविद्यालय ने पीएचडी की प्रवेश परीक्षा एनटीए से कराने का निर्णय लिया। एनटीए ने अधिसूचना में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से संबंधित विषयों को सूचीबद्ध नहीं किया। वर्तमान निर्णय संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों को आरईटी द्वारा पीएचडी में पंजीकृत होने से रोकता है। छात्रों का आरोप है कि यह निर्णय हजारों छात्रों के भविष्य को अंधकारमय कर रहा है। विश्वविद्यालय से अनुरोध है कि इस विषय पर संज्ञान लेकर तत्काल इसे एनटीए और आरईटी में शामिल कराएं या विश्वविद्यालय स्तर पर संकाय के लिए अलग आरईटी की परीक्षा कराने का निर्णय लें। शोध छात्र अधोक्षज पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अगर हमारी मांगें नहीं मानेगा तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन होगा। इस दौरान ओमकार, धीरज, सत्यम, प्रसून आदि सैकड़ों छात्र उपस्थित रहे।