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Varanasi News: मुंशी प्रेमचंद की कहानियां आज भी प्रेरणादायी

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मुंशी प्रेमचंद की कहानियों और उपन्यासों के किरदार आज भी लमही गांव में जीवंत हैं। प्रेमचंद ने उर्दू और हिंदी में कहानियां लिखीं। उनकी कहानियों के पात्र आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं। यह संदेश मुंशी प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को विशाल भारत संस्थान के सदस्यों ने रविवार को मंत्र मार्च निकालकर दिया।
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संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव और मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी की अगुवाई में मंत्र मार्च सुभाष भवन से प्रेमचंद के पैतृक आवास तक निकाला गया। इसमें शामिल विशाल भारत रंगमंच के कार्यकर्ताओं और कलाकारों ने कथा सम्राट को नमन किया। इसके बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस के मंदिर में संगोष्ठी हुई। इसमें डॉ. कवींद्र नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य समाज का दर्पण है।
अध्यक्षता कर रहे ज्ञान प्रकाश ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के साहित्य जगत में आने के बाद लोगों ने कहा कि कलम की ताकत तलवार से भी ज्यादा होती है। मुंशी प्रेमचंद का साहित्य सदैव ही समाज का वास्तविक दर्पण बनकर साहित्य जगत को रोशन करता रहेगा। युवा साहित्यकार माज अहमद, शिवम पाठक ने विचार व्यक्त किए और श्रद्धा चतुर्वेदी ने कहानी आशा का मंचन किया। उदय प्रताप पब्लिक स्कूल की श्रेया, रूद्रा, सोना, उद्देशिका, पिहू, प्राप्ति, प्रकृति, काव्या हिमानी और श्रुति ने चैती एवं कजरी के गायन की प्रस्तुति दी। इस दौरान प्रांजल श्रीवास्तव, डाॅ. अर्चना भारतवंशी, नजमा परवीन, डाॅ. मृदुला जायसवाल, सुनीता श्रीवास्तव, बिंदू, धनेसरा, रमता श्रीवास्तव आदि मौजूद रहीं।
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