आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा विकसित भारत का संकल्प मातृशक्ति के योगदान से 10 साल पहले ही पूरा हो जाएगा। मातृशक्ति संगीत, संस्कृति और सभ्यता देती हैं। दुनिया जेंडर इक्वलिटी की बात करती है, लेकिन भारत ने इसे करके दिखाया। अमेरिका जैसे देश में आज तक कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बनी।शनिवार को त्रयंबकेश्वर भवन में महिलाओं से संवाद करते हुए श्रीश्री ने कहा कि एक महिला कई लोगों पर प्रभाव डालती है। आज महिलाएं हर कार्य में योगदान कर रही हैं। हमारे देश में महिलाएं सशक्त हैं और प्राचीन काल से आगे रही हैं। 70 साल से श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन करने हर कोई आता था, तंग गलियां थीं। पूजा करने हर कोई आता था लेकिन विश्वनाथ की कद्र, काशी की कद्र कोई नहीं करता था। सब भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था। आज धाम की भव्यता दुनिया देख रही है।
उन्होंने महिलाओं का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत में योगदान के लिए सबसे पहले हमें स्वच्छता अभियान में भाग लेना होगा। हमें अपने पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखना होगा, हम जितना प्लास्टिक का उपयोग करेंगे उसका प्रभाव पर्यावरण पर पड़ेगा। हमारी संस्कृति सशक्त महिलाओं की है। देवताओं ने भी इसे माना है शिक्षा की देवी मां सरस्वती, धन की देवी मां लक्ष्मी और रक्षा करने वाली देवी मां दुर्गा हैं।
संवाद के दौरान एक महिला ने श्रीश्री से पूछा कि गुरुजी जीवन की सबसे बड़ी सफलता क्या है? श्रीश्री ने कहा कि सफलता एक गुलामी है। हमें मानव जीवन मिला है वही हमारे लिए सफलता है। हमारे जीवन में सबसे बड़ी सफलता यही है कि हम किसी के काम आएं। इसके पूर्व श्रीश्री रविशंकर ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन किया। बाब विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के बाद उन्होंने स्वर्ण शिखर को नमन किया। श्रद्धालुओं ने श्रीश्री रविशंकर को अपने बीच देखकर हर-हर महादेव के जयघोष से उनका अभिवादन किया।